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मण्डी में चना- सरसों की बम्पर आवक, समर्थन मूल्य की नहीं आई गाइडलाइन

बस्सी. सरकार ने 10 अप्रेल से समर्थन मूल्य पर चने व सरसों की खरीद करने की तैयारी कर रखी है, लेकिन अभी तक समर्थन मूल्य खरीद केन्द्रों पर गाइडलाइन ही नहीं भेजी है, जबकि खरीद शुरू होने के मात्र 6 दिन बाकी है। हालांकि किसानों ने समर्थन मूल्य पर ऑनलाइन चना सरसों बेचने के लिए […]

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बस्सी. सरकार ने 10 अप्रेल से समर्थन मूल्य पर चने व सरसों की खरीद करने की तैयारी कर रखी है, लेकिन अभी तक समर्थन मूल्य खरीद केन्द्रों पर गाइडलाइन ही नहीं भेजी है, जबकि खरीद शुरू होने के मात्र 6 दिन बाकी है। हालांकि किसानों ने समर्थन मूल्य पर ऑनलाइन चना सरसों बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना शुरू कर दिया है। इधर, बस्सी कृषि उपज मण्डी में चना व सरसों की बम्पर आवक हो रही है।

यदि सरकार के 10 अप्रेल से ही चने व सरसों की खरीद करनी है तो गाइडलाइन भेजनी चाहिए, ताकि खरीदारी कैसे होगी,जिंसों में मानक व गुणवत्ता क्यां-क्यां जांच करनी होगी। हालांकि चना व सरसों की खरीद के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेश शुरू हो गए हैं, बस्सी खरीद केन्द्र पर चना व सरसों बेचने के लिए 20 किसान रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इस बार चने का समर्थन मूल्य भाव 5650 व सरसों 5950 रुपए प्रति क्विंटल है।

जबकि मण्डी में भी कमोबेश यही भाव हैं। कृषि उपज मण्डी में चने की बम्पर आवक हो रही है। मण्डी में पिछले कई दिनों से 4 से 5 हजार कट्टा चना आ रहा है। 6 अप्रेल का रामनवमी का सावा है, जिन किसानों के शादी-विवाह है, वे किसान अपना माल बेच रहे हैं, ताकि शादियों में पैसा काम आ जाएगा।

अभी तक नहीं आया बारदाना…

खरीद केन्द्र प्रभारी शशि शर्मा ने बताया कि चने व सरसों की खरीद राजफेड करवाएगी। राजफेड भी क्रय विक्रय सहकारी समितियों के माध्यम से खरीद करेगी। लेकिन क्रय-विक्रय सहकाी समिति पर अभी तक कोई दिशा निर्देश नहीं आए है। चना व सरसों की खरीद तो 10 अप्रेल से ही शुरू होगी, लेकिन अभी तक उनके पास कोई गाइडलाइन नहीं आई है और अधिकारियों ने भी कोई दिशा निर्देश नहीं दिए हैं। खरीद के लिए टैण्डर हो गए। केन्द्र पर अभी तक बारदाना नहीं आया है।

सरसों महीने पहले ही हो जाती है तैयार…

रबी की फसलों में सबसे पहले सरसों की फसल तैयार हो जाती है और समर्थन मूल्य पर खरीद 10 अप्रेल से शुरू की जाती है। सरसों की फसल फरवरी के दूसरे व मार्च के पहले पखवाड़े के बीच ही तैयार हो जाती है। इसके बाद जौ की फसल, फिर चना व सबसे बाद में गेहूं की फसल तैयार होती है।(कासं)