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स्कूटी सवार के साथ पैदल महिला राहगीर भी होते है परेशान
बाड़मेर। शहर के जवाहर चौक से ढ़ाणी, हनुमान मंदिर से सब्जी मंडी तक सड़कों पर दिनभर जाम की स्थिति रहती है। वनवे होने के बावजूद कई बार तो पैदल राहगीर भी परेशान हो जाते है। कई बार महिलाओं को सिर पर सामान रखे जाम निकलने का इंतजार करना पड़ता है।
शहर की पुरानी सब्जी मंडी में सुबह से शाम तक सब्जी खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है। सब्जी मंडी पहुंचने के लिए जवाहर चौक और हनुमान जी मदिर का मुख्य रास्ता है। सब्जी खरीद में इतना समय नहीं लगता। जितना समय जाम में फसने के बाद लग जाता है। पैदल महिलाओं को सिर पर सामान रखे जाम खुलने का इंतजार करना पड़ता है, वहीं स्कूटी सवार महिलाओं को पांव सड़क पर रखकर चलानी पड़ती है। जवाहर चौक से इलोजी बाजार तक दो टैक्सी भी आमने-सामने आने पर दुपहिया वाहनों की कतार लग जाती है। जिसमें पैदल राहगीर की परेशानी बढ़ जाती है। कई दुपहिया चालक तो जाम की स्थिति को भापते ही यू टर्न ले लेते है। ऐसे में कई बार तो कपड़े के थाल उतारने के लिए भी टेम्पों के रुकने पर इंतजार का दर्द ओर बढ़ जाता है। धार्मिक दृष्टि से पयुर्षण पर्व पर तो जैन धर्म के लोगों के लिए परेशानी ओर बढ़ जाती है। क्योंकि अधिकत्तर जैन मंदिर खागल मौहल्ले में है। वहां पर पयुर्षण पर्व पर जैन धर्म के लोग पैदल ही मंदिरों में जाते है। वहीं नवरात्रा में गढ़ मंदिर जाने के लिए भी इस रास्ते से अधिकतर धर्म प्रेमी जाते है। चिंद्रियों की जाल व जवाहर चौक वालों को हनुमान मंदिर भी इसी रास्ते जाना पड़ता है। ऐसे में धार्मिक दृष्टि से भी इस रास्ते की प्रमुखता बढ़ जाती है।
पांव सड़क पर रखकर ही चलानी पड़ती है स्कूटी
दिन में दो बार तो इस रास्ते आना ही होता है। जब भी आते है तो अधिकत्तर जाम की स्थिति रहती है। जवाहर चौक से ईलोजी बाजार तक आ जाते है तो स्कूटी पर पांव भी नहीं रख पाते है।
ममता बोहरा
घर वालों को जवाब देना पड़ता है
घर वाले घर पर पहुंचते ही एक प्रश्न करते है कि इतनी देर कहां लगी। हर बार जाम लगा रहता है। कई बार दो सौ मीटर की दूरी पार करने में भी दो घंटों समय लग जाता है। जाम में एक बार फस गए तो निकलना मुश्किल हो जाता है।
राजुल जैन
मंदिर जाना हो या अन्य किसी कार्य से बाजार आएं तो जाम की स्थिति ही नजर आती है। सड़क के दोनों किनारें दुपहिया वाहन होते ही है। लेकिन दो फॉर विल्हर आमने सामने आते है तो इस जाम में महिलाएं फस जाती है। जाम से निकलने की चिंता के साथ घर की चिंता भी सताने लगती है।
वीरता
एक हाथ सब्जी, दूसरे में बच्चा, जाम से निकलने का इंतजार
सामान व सब्जी खरीदने के लिए बाजार आते है तो दो-तीन गलीयों में जाम का सामान करना ही पड़ता है। एक हाथ में सब्जी होती है और दुसरे हाथ में बच्चा होता है ऐसे में दो मिनट भी बाजार में खड़े नहीं रह पाते है। लेकिन जाम की स्थिति के चलते आधे घंटें से ज्यादा भी खड़ा रहना पड़ता है।
केलम