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ब्लैक लिस्ट फर्म को पांच करोड़ का ठेका देने में फंसे कई अफसर, जाने कौन हैं निगम के गुनेहगार

नगर निगम में अंधेरगर्दी का आलम ये है कि एक साल से ब्लैकलिस्ट फर्म काम कर रही है। उसे 5.25 करोड़ का टेंडर दिया गया। टेंडर देने वाली कमेटी अपर नगर आयुक्त, सहायक लेखाधिकारी और पर्यावरण अभियंता की टीम ने अपनी आंखें मूंद कर ब्लैक लिस्ट फर्म को टेंडर दे दिया।

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अपर नगर आयुक्त सुनील कुमार यादव, पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी और सहायक लेखा अधिकारी हृदय नारायण

बरेली। स्मार्ट सिटी से ब्लैक लिस्ट हुई आगरा की परमार कंस्ट्रक्शन को पांच करोड़ से ज्यादा का टेंडर देने में नगर निगम के अफसर फंस गये हैं। गुनेहगारों की जांच पड़ताल शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक ब्लैकलिस्ट फर्म ने यूपी के कई जिलों में तथ्यों को छिपाकर करोड़ों के टेंडर ले रखे हैं। बरेली में नगर आयुक्त के आदेश पर चीफ इंजीनियर के नेतृत्व में गठित कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। टेंडर देने वाली कमेटी सवालों के घेरे में है।

नगर निगम में अंधेरगर्दी का आलम ये है कि एक साल से ब्लैकलिस्ट फर्म काम कर रही है। उसे 5.25 करोड़ का टेंडर दिया गया। टेंडर देने वाली कमेटी अपर नगर आयुक्त, सहायक लेखाधिकारी और पर्यावरण अभियंता की टीम ने अपनी आंखें मूंद कर ब्लैक लिस्ट फर्म को टेंडर दे दिया। आशंका है कि इस बार भी फर्म ने फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाये हैं। इसके अलावा कमेटी ने अपनी चहेती फर्म को ठेका दिलाने के लिये ईपीएफओ की शर्त को भी टेंडर से हटा दिया।

सीनियर की जांच कर रहे जूनियर अफसर, कैसे होगा इंसाफ

टेंडर कमेटी में अपर नगर आयुक्त सुनील कुमार यादव, सहायक लेखा अधिकारी हृदय नारायण और पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी शामिल थे। अपर नगर आयुक्त सीनियर पीसीएस अफसर हैं। जबकि उनकी जूनियर उप नगर आयुक्त पूजा त्रिपाठी उनकी जूनियर हैं। हालांकि इसमें नियम कायदे और कानूनों के जानकार नगर निगम के चीफ इंजीनियर मनीष अवस्थी भी हैं। इस वजह से गड़बड़ी की आशंका कम है, लेकिन फिर भी सीनियर अफसरों की जांच जूनियर से कराने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

फर्म को दो साल के लिये ब्लैकलिस्ट बताकर, गर्दन बचाने में जुटे अफसर

जांच के घिरे अफसर नगर आयुक्त को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, दावा कर रहे हैं कि फर्म को दो साल के लिये ब्लैक लिस्ट किया गया था। जबकि आदेश में ऐसा उल्लेख नहीं किया गया है। आदेश स्पष्ट है कि परमार कंस्ट्रक्शन ने फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाकर तथ्यों को छिपाया। इस वजह से उसे ब्लैक लिस्ट किया गया था। इसके बाद से अब तक फर्म को ब्लैक लिस्ट की श्रेणी से किसी ने बाहर नहीं किया। अब देखना है कि नगर निगम के तेज तर्रार और ईमानदार अधिकारी नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य टेंडर कमेटी के गुनाहों पर पर्दा डालते हैं या मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करते हैं।

पांच साल पहले ब्लैक लिस्ट हुई फर्म, पूरी यूपी में कर रही काम

आगरा की परमार कंस्ट्रक्शन को अक्टूबर 2020 में स्मार्ट सिटी कंपनी बरेली ने ब्लैक लिस्ट किया था। तब से लेकर अब तक फर्म ब्लैक लिस्ट है, लेकिन फर्म ने तथ्यों को छिपाकर यूपी के कई जिलों में टेंडर ले रखे हैं। इसी क्रम में बरेली नगर निगम ने शहर के सभी डिवाइडर, पार्क और रोड किनारे पेड़ों के रखरखाव का 5.28 करोड़ का टेंडर दे दिया। अब फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है।

महापौर का बयान

टेंडर निकालने से पहले प्रपत्रों की जांच की जानी चाहिये थी। बरेली से ब्लैक लिस्ट फर्म को बरेली नगर निगम में ही टेंडर दे दिया गया। इसके अलावा टेंडर की शर्तों में भी गोलमाल किया गया। जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद दोषी अधिकारियों और फर्म पर कार्रवाई की जायेगी।

डा. उमेश गौतम, महापौर, बरेली