संजय सिंह कुशवाह/बांसवाड़ा. आधुनिक युग में की-बोर्ड पर सरपट दौड़ती अंगुलियां कम्प्यूटर के पर्दे पर एक मोहक संसार जरूर रचती है। लेकिन बही खातों में कागज और स्याही का समागम समय के साथ धुंधला तो पड़ सकता है पर किसी वायरस से डिलीट नहीं हो सकता। दीपावली के दिन बही खाता लिखने का काम आज भी अधिकांश व्यापारी उसी तरह करते हैं जैसे सालों पहले किया करते थे। कइयों का मानना है कि बहीखातों में लेन-देन व जमा खर्च आदि लिखना ज्यादा आसान रहता है। पुरातन परम्परानुसार बहीखाते हर दीवाली पूजकर सालों तक सम्भाल कर रखे जाते हैं। शहर के दाहोद रोड स्थित बहीखाता बेचने वाले व्यापारी यूसुफ बोरीगामा बताते है कि कम्प्यूटर का चलन और जीएसटी के कारण पिछले कई वर्षो से बहियों का क्रेज कम पड़ा है लेकिन आज भी व्यापारी इसे शगुन के तौर पर अपनी दुकानों में जरुर रखते है।
कांटे-बाट और औजार भी पूजे जाते हैं : – बेशक आधुनिक और तकनीक के इस दौर में कम्प्यूटर-लैपटॉप नई पीढ़ी के लिए आवश्यकता बन गए है। लेकिन अधिकांश व्यापारी परम्परागत तौर पर आज भी अपने प्रतिष्ठानों पर बही-खातों तराजू या नाप-तौल के औजारों से ही दीवाली पूजन करना पसंद करते हैं। ऐसी मान्यता चली आ रही है कि दीपावली के दिन प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन के अलावा गणेश, सरस्वती, कुबेर आदि की पूजा और दीप प्रज्ज्वलित करना व्यापार वृद्धि के लिए शुभ होता है।
ऐसे होती है बही-खातों की पूजा : – नए बही-खाते में केसर युक्त चंदन या लाल स्याही अथवा कुमकुम से स्वास्तिक चिह्न बनाकर प्रथम आराध्य श्री गणेशाय नम: लिखते हुए भगवती महासरस्वती का ध्यान करते हुए गंध-पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य से पूजन आराधना की जाती है। इस दौरान कारोबार सहित परिवार में सुख-समृद्धि और सर्वत्र खुशहाली की कामना करते महालक्ष्मी का खासतौर पर आह्वान किया जाता है। शहर के कई व्यापारिक प्रतिष्ठान आज भी दीवाली पर खाते-बही के साथ तिजोरी और कांटे-बाट की पूजा करना नहीं भूलते।
कई प्रकार की होती है बहियां : – बाजार में ग्राहकों की मांग के मुताबिक 11 इंच चौड़ाई और 14 इंच लंबाई वाली 350 पेज की बही रोकड़ लेन-देन के लिए प्रयोग में ली जाती है। इसी तरहए 8.3 इंच चौड़ाई 14 इंच लम्बाई वाली 200 से 250 पेज की बही में व्यापारियों का अलग हिसाब रखा जाता है। इसके अलावा, 7 इंच चौड़ाई व 8.3 इंच लम्बाई वाली बहियां डेली रूटीन अकाउंट के लिए 400 से 1000 पेज की बनती हैं। अधिकांशत छोटे व्यापारी इसे काम में लेते हैं।