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हाई कोर्ट ने प्रज्वल रेवण्‍णा की जमानत याचिका पर राज्य सरकार को जारी किया नोटिस

हाई कोर्ट ने सोमवार को जनता दल-एस नेता और पूर्व सांसद प्रज्वल रेवण्‍णा द्वारा दायर जमानत याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। यह याचिका हासन जिले के होलेनरसीपुर ग्रामीण पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ दर्ज पहले कथित बलात्कार मामले के संबंध में दायर की गई।

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बेंगलूरु. हाई कोर्ट ने सोमवार को जनता दल-एस नेता और पूर्व सांसद प्रज्वल रेवण्‍णा द्वारा दायर जमानत याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। यह याचिका हासन जिले के होलेनरसीपुर ग्रामीण पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ दर्ज पहले कथित बलात्कार मामले के संबंध में दायर की गई।

जस्टिस प्रदीप सिंह येरूर ने राज्य को नोटिस जारी किया और उसे सुनवाई की अगली तारीख 15 अप्रैल तक अपनी आपत्तियां दर्ज करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट प्रभुलिंग के नवदगी ने याचिकाकर्ता की जल्द सुनवाई की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि मामले में सह-आरोपी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत की समन्वय पीठ ने मुकदमे पर रोक लगाई।

उन्‍होंने कहा, मैं प्रथम दृष्टया दिखाउंगा कि साढ़े चार साल बाद शिकायत दर्ज की गई। इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि इतनी देरी के बाद शिकायत क्यों दर्ज की गई। इसके अलावा उन्होंने कहा, मैं अपने नियंत्रण से परे कारणों से सलाखों के पीछे नहीं रह सकता यह विचार करने के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। एक भी परिस्थिति, जो बाद के निर्णय को बदल देती है, पूरे मामले पर फिर से विचार करने की मांग करती है।

अतिरिक्त विशेष लोक अभियोजक बी एन जगदीश ने दलील का विरोध करते हुए कहा, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी और वर्तमान जमानत याचिका में कोई भी बदली हुई परिस्थिति नहीं दिखाई गई, जिस पर विचार किया जाना चाहिए। इसके अलावा याचिकाकर्ता मामले में मुख्य आरोपी है। अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया।

इसके बाद अदालत ने कहा, तथ्य यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी। भले ही किसी अन्य आरोपी के कहने पर रोक हो, अगर आपके खिलाफ ठोस सामग्री है। आपने कुछ ऐसा असाधारण पेश किया, जिस पर पहले के न्यायाधीश ने विचार नहीं किया, तो जमानत दी जा सकती है।

अदालत ने बताया कि समय की कमी के कारण वह मामले की सुनवाई नहीं कर पाएगी। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को तय की गई। साथ ही अभियोजन पक्ष को याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए गुण-दोष के बिंदु पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया।

हाल ही में एडिशनल सिटी सिविल और सेशन जज संतोष गजानन भट ने रेवण्‍णा के खिलाफ विभिन्‍न धाराओं के तहत आरोप तय किए।

अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता रेवण्‍णा परिवार के स्वामित्व वाले फार्महाउस में नौकरानी के रूप में काम करती थी। दावा किया जाता है कि 2021 से कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान रेवण्‍णा ने बार-बार उसके साथ बलात्कार किया और विभिन्न स्थानों पर यौन हमलों को फिल्माया। इसके अलावा यह आरोप लगाया गया है कि रेवण्‍णा ने वीडियो का इस्तेमाल उसे डराने और चुप कराने के लिए किया जिससे वह शिकायत करने से रुक गई।

एसआइटी प्रज्वल के खिलाफ दर्ज तीन मामलों की जांच कर रही है, जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है। एसआइटी ने पिछले साल 30 मई को जर्मनी से आने पर प्रज्वल को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया। उसे होलेनरसीपुर टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध संख्या 107/2024 में गिरफ्तार किया गया।

इससे पहले अक्टूबर, 2024 में हाईकोर्ट ने रेवण्‍णा द्वारा दायर जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था और अगले महीने नवंबर, 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके द्वारा दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।

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