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सौ साल पहले प्रकट हुए गणपति बप्पा, दर्शन मात्र से भर जाती है सूनी गोद

बालोद जिला मुख्यालय ऐसा प्राचीन गणेश मंदिर है, जहां दर्शन मात्र से लोगों की सूनी गोद भर जाती है। मरारपारा (गणेश वार्ड) में जमीन के भीतर से प्रगट हुए सौ साल पुराने स्वयंभू गणेश मंदिर में नि:संतान महिलाएं बच्चे की आस लेकर आती हैं। लोगों में ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले नि:संतान दंपती को संतान का सुख देते हैं।

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गणेश चतुर्थी आज

मरारपारा (गणेश वार्ड) में जमीन के भीतर से प्रगट हुए सौ साल पुराने स्वयंभू गणेश मंदिर ।

बालोद. जिला मुख्यालय में ऐसा प्राचीन गणेश मंदिर है, जहां दर्शन मात्र से लोगों की सूनी गोद भर जाती है। मरारपारा (गणेश वार्ड) में जमीन के भीतर से प्रगट हुए सौ साल पुराने स्वयंभू गणेश मंदिर में नि:संतान महिलाएं बच्चे की आस लेकर आती हैं। लोगों में ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले नि:संतान दंपती को संतान का सुख देते हैं। यही कारण है कि गणेश चतुर्थी के अलावा सालभर भक्तों का यहां तांता लगा रहता है। जमीन से निकले स्वयं-भू भगवान गणपति के प्रति लोगों की आस्था और श्रद्धा बढ़ती जा रही है। सबसे पहले दो लोगों ने मूर्ति स्थापित कर पूजा की शुरुआत की। फिर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। गणेश चतुर्थी के 11 दिनों के अलावा बप्पा के वार बुधवार को भी महाआरती होती है।

लगभग सौ साल पहले प्रगट हुए थे गणेश
मंदिर के सदस्य व पार्षद सुनील जैन ने बताया कि जिला मुख्यालय के मरार पारा में लगभग 100 साल पहले जमीन के भीतर से भगवान गणेश प्रगट हुए। सबसे पहले स्व. सुल्तानमल बाफना और भोमराज श्रीमाल की नजर पड़ी। पहले बाफना परिवार के किसी सदस्य के सपने में बप्पा आए थे। दोनों व्यक्तियों ने स्वयं-भू गणपति के चारों ओर टीन शेड लगाकर एक छोटा-सा मंदिर बनाया था। लोगों की आस्था बढ़ती गई और मंदिर का विस्तार होता गया। इन दोनों के निधन के बाद से उनका परिवार व मोरिया मंडल परिवार पूजा-अर्चना कर रहा है।

अभी भी जमीन के अंदर है मूर्ति का कुछ हिस्सा
स्वयं-भू श्री गणेश के घुटने तक का कुछ हिस्सा अभी भी जमीन के भीतर है। लोग बताते हैं कि पहले गणेश का आकार काफी छोटा था, लेकिन धीरे-धीरे बढ़ते गया। आज बप्पा विशाल स्वरूप में हैं। गणपति का आकार लगातार बढ़ता देख भक्तों ने वहां पर मंदिर बनाया है। मंदिर में दूरदराज के लोग अपनी मनोकामना लेकर आते हैं।

मोरिया मंडल परिवार
मंदिर में 2006 से महिला, पुरुष व युवक-युवतियों की टोली बनी, जिसे मोरिया मंडल परिवार नाम दिया गया। मंडल के सदस्यों के साथ लोग भी गणेश की सेवा व पूजा-अर्चना करते हैं। जमीन से प्रकट हुए भगवान गणेश मंदिर समिति में लगभग 100 सदस्य प्रमुख हैं। मंदिर से जुड़े और कई लोग हैं, जो मंदिर में गणेश चतुर्थी के अलावा अन्य प्रमुख पर्व पर महाप्रसादी, हर बुधवार को महाआरती का आयोजन करते हैं। इस गणेश चतुर्थी भी यहां विविध धार्मिक आयोजन होंगे।