
mandi bhav
अलवर। बारिश हो रही हो और गर्मागर्म पकौड़े मिल जाएं तो कहना ही क्या। मगर चने के बढ़ते दामों ने पकौड़ी का स्वाद बिगाड़ दिया है। एक सप्ताह में ही इसके भाव 300 रुपए चढ़कर 7500 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गए हैं। इसका असर यह हुआ कि चने की दाल और बेसन में भी तेजी आई है। आगामी दिनों में मांग बढ़ने के साथ चने के भाव में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार देश में 35 प्रतिशत चने का उत्पादन कम हुआ है। इससे मंडी में चने की आवक कमजोर रही। सरकार के पास भी चने का स्टॉक कम है और विदेशी बाजार में भी चने की उपलब्धता कम होने के कारण सरकार की ओर से आयात शुल्क में छूट के बाद भी विदेशों से चने की आवक नहीं हो रही है। जबकि पिछली बार चने का बाजार भाव समर्थन मूल्य से भी कम था।
अच्छी बारिश के कारण इस बार किसानों का चने की खेती की तरफ रूझान बढ़ रहा है। खास बात यह भी है कि चने की बुवाई के दौरान किसान बीज के रूप में चने को ही काम में लेते हैं। इसके कारण सितंबर-अक्टूबर में बुवाई का सीजन शुरू होते ही चने की मांग और भी बढ़ेगी। त्योहारी सीजन में चने के भाव में 500 से एक हजार रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आ सकती है।
इस वर्ष चने का उत्पादन काफी कम हुआ है। इसके कारण आगामी त्योहारी सीजन में मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं होने से चने के भाव में और तेजी की संभावना है। इससे चना दाल और बेसन के भाव भी प्रभावित होंगे।
-सुरेश जलालपुरिया, अध्यक्ष, कृषि उपज मंडी व्यापार मंडल।
Updated on:
01 Sept 2024 02:06 pm
Published on:
01 Sept 2024 01:59 pm
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