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लोस चुनाव में पार्टियों का गणित बिगाड़ सकते हैं विधानसभा के बागी

भाजपा व कांग्रेस का खेल बिगाड़ा है अपने ही बागियों ने, अब उन्हें मनाने में जुटी हैं पार्टियां

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लोस चुनाव में पार्टियों का गणित बिगाड़ सकते हैं विधानसभा के बागी

लोस चुनाव में पार्टियों का गणित बिगाड़ सकते हैं विधानसभा के बागी

विधानसभा चुनाव में बागी हुए खिलाडिय़ों को राजनीतिक दल लोकसभा चुनाव में मनाने में जुटे हैं। उनकी बगावत के चलते भाजपा को सीटें गंवानी पड़ी हैं और कांग्रेस ज्यादा बढ़त नहीं बना पाई।
विधानसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस ने जैसे ही टिकटों की घोषणा की तो घमासान हो गया। टिकट के दावेदारों ने विरोध शुरू कर दिया। उन्हें पार्टियों ने काफी मनाने की कोशिश की लेकिन कुछ ही मान पाए। बाकी लोग चुनाव में खड़े हुए। तीसरे मोर्चे से टिकट लेकर आए। किसी प्रत्याशी ने भाजपा को तीसरे नंबर पर पहुंचने पर मजबूर कर दिया तो कहीं पर कांग्रेस को मात मिली।

ये रहा कांग्रेस का रेकॉर्ड
इसी तरह कांग्रेस ने किशनगढ़बास से दीपचंद खैरिया को मैदान में उतार दिया तो सिमरत कौर ङ्क्षसधू नाराज हो गई और वह बसपा से टिकट लेकर मैदान में उतरी। 20 हजार से ज्यादा वोट लिए। इससे कांग्रेस की यहां से बड़ी जीत नहीं हो पाई। आखिरी समय तक ये सीट फंसी रही थी। मुंडावर से अंजली यादव टिकट मांग रही थी लेकिन नहीं मिला तो मैदान में उतरी। काफी वोट लिए। यहां जीत कांग्रेस की हुई लेकिन वह पार्टी में रहती तो और वोटों में बढ़त मिलती। बताते हैं कि अब भाजपा व कांग्रेस अपने-अपने मजबूत बागियों को घर लाने की तैयारी में हैं।

भाजपा इसी तरह पीछे रही
रामगढ़ से भाजपा ने जय आहूजा को टिकट दिया था। यहां सुखवंत ङ्क्षसह ने विरोध किया और चुनावी मैदान में आ गए। उन्होंने भाजपा को तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया। यहां सुखवंत ङ्क्षसह दूसरे स्थान पर रहे थे। इसी तरह बानसूर से कभी भाजपाई रहे रोहिताश शर्मा ने भी इस सीट पर ताल ठोक दी। भाजपा को यहां जीत तो मिल गई लेकिन पार्टी बड़ी बढ़त नहीं बना पाई। थानागाजी से भूपेश राजावत व रोहिताश्व घांघल टिकट के दावेदार थे। भाजपा ने यहां से हेम ङ्क्षसह भड़ाना को मैदान में उतारा तो दोनों दावेदार बागी हो गए। परिणाम आया तो भाजपा को यहां हार का सामना करना पड़ा।

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