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108 साल पुराना है दयालबाग का इतिहास, 10 हेक्टेयर जमीन पर क्यों है विवाद, जानें सबकुछ

Radhasoami Satsang Sabha History: उत्तर प्रदेश की ताजनगरी आगरा में दयालबाग का इतिहास 108 साल पुराना है। यहां राधा स्वामी सत्संग सभा का हेडक्वार्टर और राधास्वामी सत्संग के आठवें संत डॉ. प्रेम सरन सतसंगी का निवास भी है। आइए जानते हैं यहां पर विवाद की असली जड़ क्या है?

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आगरा

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Vishnu Bajpai

Sep 25, 2023

108 year old history Dayal bagh 10 hectare land cause of dispute in Agra

राधा स्वामी सत्संग सभा आगरा का विवाद गरमाया।

Radhasoami Satsang Sabha in Agra: राधास्वामी सत्संग सभा के अनुयायी इस समय पूरी दुनिया में फैले हैं। आगरा का दयालबाग इसका मुख्य केंद्र है। यानी यहां पर राधा स्वामी सत्संग सभा का हेडक्वार्टर है। राधा स्वामी सत्संग सभा के अनुयायी बताते हैं कि साल 1861 में बसंत पंचमी के दिन हुजूर स्वामीजी महाराज ने सबसे पहले यहां पन्नी गली में सत्संग शुरू किया था। इसी दिन राधास्वामी मत भी प्रचलन में आया। उन्होंने इस जगह का नाम 'दयालबाग' रखा था। दयालबाग में एक कुआं है। जो मुबारक कुएं के नाम से जाना जाता है। इसका अलग महत्व और इतिहास है। रविवार को दयालबाग में राधास्वामी सत्संग सभा और प्रशासन के बीच बवाल के बाद अधिकारियों को बैकफुट पर आना पड़ा। फिलहाल अभी यहां तनावपूर्ण शांति है। ऐसे में इस बवाल के बीच में हम आपको राधास्वामी मत और दयालबाग के बारे में बताते हैं।

राधा स्वामी सत्संग सभा से जुड़े अनुयायी बताते हैं कि हुजूर स्वामीजी महाराज सुबह जब घूमने जाते थे तो वो दातून करने के बाद मुबारक कुएं के पानी का प्रयोग करते थे। 20 जनवरी 1915 को बसंत पंचमी के दिन राधास्वामी मत के पांचवें आचार्य हुजूर साहब जी महाराज ने 'मुबारक कुएं' के पास शहतूत के पौधे का रोपण कर दयालबाग कालोनी की नींव रखी थी। बीत चुकी बसंत पंचमी पर दयालबाग कालोनी को 108 साल पूरे हो गए हैं।

राधास्वामी सत्संग सभा ने दयालबाग काॅलोनी की स्थापना 20 जनवरी 1915 को शहतूत का पौधा रोपकर की थी। यह 40 सदस्यीय सभा 1860 के एक्ट-21 के तहत रजिस्टर की गई थी। सभा का पूरा नाम ‘राधास्वामी सत्संग सभा, दयालबाग, आगरा’ के नाम से दर्ज कराया गया है। सभा के बायलॉज और संविधान में स्पष्ट लिखा है कि सभा केवल उन संपत्तियों का प्रबंधन करेगी जो राधास्वामी दयाल को दान में दी गई हैं या अधिगृहीत की गई है। ब्रिटिश सरकार के समय में ही 1943 से 1949 तक मेडिकल काॅलेज, खेल मैदान, काॅलोनी बनाने, शिक्षण संस्थान के लिए जमीन अधिग्रहण करने के लिए सत्संग सभा ने प्रस्ताव दिए थे।

मुबारक कुआं और शहतूत का पेड़ आज भी संरक्षित
राधास्वामी मत के दूसरे आचार्य (संत सतगुरु) कुएं से पानी खींचकर हुजूर स्वामीजी महाराज की सेवा में पेश करते थे। उस समय कुएं के आस-पास ऊंचे-ऊंचे टीले और कंटीली झाड़िया थीं। इस परिसर में 'मुबारक कुआं' और 'शहतूत का पेड़' आज भी संरक्षित है। अब यहां 1200 एकड़ जमीन पर हरे-भरे खेत लहलहा रहे हैं।

राधास्वामी सत्संग सभा, दयालबाग 1910 में बनी थी। पहली बार आजाद भारत में 1949 में विद्युत नगर का रास्ता बंद करने के मामले में कलेक्ट्रेट में लोगों ने इनके खिलाफ प्रदर्शन किया था। उसके बाद लगातार प्रदर्शन, पथराव, गोलीबारी, मारपीट के मामले होते गए, पर प्रशासन एक बार भी कार्रवाई नहीं कर पाया। पूर्व विधायक विजय सिंह राणा ने 1984 में आंदोलन की शुरूआत की, पर सत्संग सभा ने कब्जे नहीं हटाए। पहली बार शनिवार को डीएम भानु चंद्र गोस्वामी के आदेश पर सत्संग सभा के छह गेट ध्वस्त किए गए।

1967 बीघा जमीन साल 1942 में ब्रिटिश सरकार से मांगी गई
राधास्वामी सत्संग सभा ने दयालबाग में काॅलोनी के बाद जमीनों का सिलसिला 1942 से शुरू किया। तत्कालीन अध्यक्ष पीबी जीडी मेहता, राय बहादुर की अध्यक्षता वाली सभा के सचिव बाबूराम जादौन ने ब्रिटिश सरकार से कुल 1967 बीघा जमीन मांगी थी। इसमें मेडिकल काॅलेज, डेयरी फार्म, काॅलोनी का विस्तार, खेल मैदान, ईंट-भट्ठा आदि के लिए जमीनों के अधिग्रहण के प्रस्ताव दिए गए थे।

खासपुर, घटवासन, लखनपुर, जगनपुर मुस्तकिल, सिकंदरपुर, मनोहरपुर, नगला पदी, मऊ में जमीनों को लेकर विवाद तभी से शुरू हुए। साल 1948 से 50 के बीच ग्रामीणों और राधास्वामी सत्संग सभा के बीच कई बार टकराव हुए और कलेक्ट्रेट पर सत्संग सभा के विरोध में प्रदर्शन, धरना भी चलते रहे। पहली बार सत्संग सभा के पदाधिकारियों पर प्रशासन एफआईआर करा पाया है।

राधास्वामी सत्संग सभा के दयालबाग केंद्र का ये है ताजा विवाद
कुछ माह पहले सत्संग सभा ने खेतों के चक रोड, मेन रोड और नहर आदि की जमीन पर गेट लगाकर किसानों का आवागमन बंद कर दिया। 28 अप्रैल, 2023 को पोइया घाट पर 155 बीघा जमीन कब्जाने के साथ 10 हेक्टेयर जमीन पर गेट लगाने के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। नोटिस का समय बीतने पर शनिवार को बुलडोजर चलाया गया। बीते सप्ताह सभा के अध्यक्ष और दो उपाध्यक्षों को भूमाफिया घोषित करने की सिफारिश तहसील स्तरीय एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स कर चुकी है।

दौड़ती रही रही सत्संगियों की एंबुलेंस
रविवार को कब्जा हटाने पहुंची पुलिस-प्रशासन की टीम में शामिल जवानों ने बताया कि टेनरी वाले गेट पर पहले से ही एक एंबुलेंस खड़ी थी। इसमें कोई मरीज नहीं था। जैसे टीम ने टेनरी वाले गेट को गिराने की कवायद शुरू की। वहां सैकड़ों की संख्या में जमा अनुयायी पुलिस पर टूट पड़े। संघर्ष के दौरान चोटिल हुए सत्संगियों को इसी एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। इस पर कई बार झड़पें हुईं, इसके बाद पुलिस ने सत्संगियों के वाहनों की चेकिंग की।

स्थानीय खुफिया तंत्र (एलआईयू) एक बार फिर फेल
ऐसा नहीं है कि पहली बार खुफिया तंत्र फेल हुआ है। शहर में कई बार बवाल की घटनाओं में सिर्फ कागजी रिपोर्ट का ही सहारा रहता है। सत्संग सभा पर रास्तों को रोकने का आरोप लगाया गया। तीसरा केस शनिवार को दोबारा कब्जा करने का लिखा गया। इसके बावजूद पुलिस का खुफिया तंत्र सत्संगियों की तैयारी का आकलन नहीं कर सका। बवाल के बाद हमलावर आसानी से निकल गए।

शहर में छोटे-बड़े आयोजन, बैठकों के बारे में स्थानीय खुफिया तंत्र की रिपोर्ट ली जाती है। सत्संगियों की तैयारी की थाह पुलिस और प्रशासनिक अफसर नहीं लगा पाए थे। उनके पास अपनी अलग वर्दी पहने बच्चे, महिलाएं और पुरुषों का एक ग्रुप भी था। पुलिस पर हमला करने के लिए कील लगे डंडे थे। इन्हें चलाने में माहिर ही नहीं, पथराव करने और बचने की कला भी सीखे हुए थे। एलआईयू के अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यहां बड़ी चूक सामने आने के बाद एक बार फिर एलआईयू की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग गए।

सत्संगियों ने पथराव करके 60 लाख रुपये के सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त
दयालबाग में सत्संग सभा और पुलिस के बीच बवाल के बाद शाम 4 बजे से यातायात को भगवान टाॅकीज चौराहे से डायवर्ट कर दिया गया। इससे भगवान टाॅकीज चौराहे पर रात 8 बजे तक जाम रहा। जानकारी के अनुसार नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, 60 लाख रुपये के वाहनों को सत्संगियों ने पथराव में क्षतिग्रस्त कर दिया।

गेट तोड़ने गए बुलडोजर के चालक की आंख पर सत्संगियों का फेंका पत्थर लगा, जिससे खून निकल आया। बुलडोजर क्षतिग्रस्त होने के साथ चालक भागा तो उसकी पिटाई की गई। जैसे-तैसे चालक ने जान बचाई। न्यू आगरा थाने के सामने से ही यातायात को हाईवे होकर गुजारा गया। इसमें पुलिसकर्मियों, मीडियाकर्मियों के साथ नगर निगम के बुलडोजर, ट्रक और ट्रैक्टर के चालक भी घायल हो गए।

आगरा से प्रमोद कुशवाह की रिपोर्ट

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