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पृथ्वी ने 46 साल में बदला रंग, NASA ने बताया कैसे नीले से लाल हुई धरती

पृथ्वी अपना रंग लगातार बदलती जा रही है। एक वक्त जब धरती को नीले रंग के चलते पहचाना जाता था। ऐसा इसलिए क्योंकि पृथ्वी का ज्यादातर हिस्सा पानी से घिरा था और अंतरिक्ष ये रंग नीला नजर आता था। अमरीकी स्पेस एजेंसी नासा ने बताया कि किसी तरह 46 वर्षों मे धरती ने अपना रंग बदल लिया है।

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NASA Release Heatwave Map Of World See How Earth Changed Color From Blue To Red

NASA Release Heatwave Map Of World See How Earth Changed Color From Blue To Red

पृथ्वी लगातार अपना रंग बदल रही है। एक वक्त था जब आकाश से पृथ्वी का रंग नीला दिखाई देता था, लेकिन अब इस रंगे में बदलाव आ चुका है और इस बदलाव के बारे में जानकारी दी है अमरीका की स्पेस एजेंसी नासा ने। NASA ने बताया कि आखिर 46 वर्षों में किस तरह धरती अपना रंग बदल रही है। पहले जहां पृथ्वी नीली दिखाई देती थी, वहीं अब इसका रंग लाल होता जा रहा है। इससे संबंधित तस्वीरें भी नासा की ओर से जारी की गई हैं। इस तस्वीरों में देखा जा सकता है कि चार दशकों में किस तरह धरती के रंग में परिवर्तन आ गया है।

ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरे के बीच पृथ्वी ने बदला रंग
बीते दो महीनों में दुनियाभर में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी। जून और जुलाई 2022 में पारा इतना उछला कि, यूरोप, उत्तरी अफ्रीका, मिडल-ईस्ट और एशिया के कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पार कर गया।

कुछ इलाकों में पारे ने थर्मामीटर रिकॉर्ड तोड़ डाले। इस बढ़ती गर्मी के चलते ही धरती के रंग में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

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नासा की ओर से बकायदा तस्वीर जारी कर ये बताया गया है कि पृथ्वी का रंग कितना बदल रहा है। एक तस्वीर जो 13 जुलाई 2022 की है। इसमें धरती के पूर्वी गोलार्ध के ऊपर सरफेस एयर टेंपरेचर दिखाया गया है, जो 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है।

इस नक्शे को गोडार्ड अर्थ ऑब्जरविंग सिस्टम (GOES) के ग्लोबल मॉडल से प्राप्त डेटा से बनाया गया है। एक्सपर्ट स्टीवन पॉसन के मुताबिक, इस नक्शे में लाल रंग वाले गर्म और नीले रंग वाले ठंडे इलाके स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रहे हैं।

1976 में नासा ने बनाया था नीली धरती वाला नक्शा
नासा की ओर से 1976 में भी पृथ्वी का नक्शा तैयार किया गया था। इस नक्शन में धरती के कई इलाके नीले रंग में दिखाई दे रहे थे। जो बताता है कि तब तापमान मौजूद समय की तुलना में काफी कम था।

इस वजह से बढ़ रहा तापमान
स्टीवन के मुताबिक, इंसानों की ओर से फैलाए जा रहे प्रदूषण, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण लगातार जलवायु में बदलाव देखने को मिल रहा है। गर्मी का स्तर भी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहा है।


गर्मी और सूखे की चपेट में पुर्तगाल, स्पेन और फ्रांस के कई हिस्से आ चुके हैं। यहां कई जंगलों में आग फैल रही है। पुर्तगाल में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंच गया है। इसके अलावा एशियाई प्रांत चीन में तो सड़कें पिघल गईं। छत टूट कर गिर गईं। भारत में भी गर्मी ने इस वर्ष कई रिकॉर्ड तोड़े।

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