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तंत्र साधना के लिए मशहूर इस मंदिर में मूर्तियां रात में आपस में करती हैं बातें, विज्ञान ने भी इस रहस्य के आगे टेके घुटने

सुनने में भले ही यह विश्वास करने लायक नहीं है, लेकिन बात सच है।

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राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर

तंत्र साधना के लिए मशहूर इस मंदिर में मूर्तियां रात में आपस में करती हैं बातें, विज्ञान भी इस रहस्य के आगे टेके घुटने

नई दिल्ली। दुनिया में अजीबोगरीब चीजों या घटनाओं की कोई कमी नहीं है। इंसान की सोच और समझ से परे इन वाक्यों को देखकर वाकई में दिमाग कई बार सुन्न हो जाता है। आज हम एक ऐसी ही जगह के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जिसके रहस्य के आगे विज्ञान ने भी घुटने टेक दिए हैं।

हम यहां राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर ? की बात कर रहे हैं जो कि बिहार के बक्सर में स्थित है। इस पुरातन मंदिर की सबसे अजीबोगरीब बात यह है कि यहां मूर्तियां आपस में बातें करती हैं। सुनने में भले ही यह विश्वास करने लायक नहीं है, लेकिन बात सच है।

करीब 400 साल पुराने इस मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध तांत्रिक भवानी मिश्र ने किया था। आज भी मंदिर के पुजारी उन्हीं के परिवार के सदस्य ही हैं। तंत्र साधना के लिए यह मंदिर बहुत मशहूर है और यहां साधकों की हर मनोकामना पूरी होती है। इस वजह से तांत्रिकों की इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है।

राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर के बारे में सबसे चमत्कारिक बात यह है कि, यहां की मूर्तियां आपस में बातें करती हैं। स्थानीय निवासयों का ऐसा कहना है कि, मध्य-रात्रि में जब चारों ओर सन्नाटा पसर जाता है तब यहां किसी के बोलने और फुसफुसाने की आवाजें सुनाई देती हैं। यहां से उस वक्त गुजरने वाले लोग इस आवाज को सुन सकते हैं।

इस रहस्य को सुलझाने के लिए यहां रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम भी गई। वैज्ञानिकों ने देखा कि अंदर किसी आदमी के न होने के बावजूद भी यहां कुछ शब्द गूंजते रहते हैं। इस आवाज को सभी ने महसूस किया और सुनकर सभी भौचक्के रह गए, लेकिन हैरान कर देने वाली बात ये थी कि काफी प्रयासों के बावजूद भी उन्हें वहां कुछ नहीं मिला।

अंत ने विज्ञान ने भी इस रहस्य के आगे घुटने टेक दिए। वैज्ञानिकों ने यह मान लिया है कि मंदिर परिसर में कुछ न कुछ अजीब जरूर है, लेकिन वो क्या है इस पर से अभी भी पर्दा नहीं उठ पाया है।

बता दें, इस मंदिर में दस महाविद्याओं काली, त्रिपुर भैरवी, धुमावती, तारा, छिन्न मस्ता, षोडसी, मातंगड़ी, कमला, उग्र तारा, भुवनेश्वरी की मूर्तियां स्थापित हैं।

इसके अलावा यहां बंगलामुखी माता, दत्तात्रेय भैरव, बटुक भैरव, अन्नपूर्णा भैरव, काल भैरव व मातंगी भैरव की प्रतिमा भी स्थापित की गई हैं।