
jagannath rath yatra 2020 live darshan
विदिशा। पुरी ( puri ) के जगन्नाथ मंदिर ( jagannath rath yatra 2020 ) में जब भगवान का रथ ( rath yatra ) खींचा जा रहा होता है, तब थोड़ी देर के लिए रथ में कंपन्न होने लगता है, रथ ठहर जाता है, तभी वहां के पुजारी घोषणा करते हैं कि भगवान 'मानोरा' पधार गए हैं।
यह मानोरा गांव ( manora ) मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में हैं। इस छोटे से गांव में हर साल लाखों लोग रथ यात्रा में भगवान के दर्शन करने उमड़ते हैं, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण सोशल डिस्टेंसिंग की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। इस बार बाहर के लोग तो नहीं आए, लेकिन गांव के ही लोग भगवान का दर्शन कर पाए।
पत्रिका.कॉम ने भी इस बड़े आयोजन को लाइव ( jagannath rath yatra 2020 live darshan ) दिखाने की व्यवस्था की है। इसे आप पत्रिका मध्यप्रदेश के फेसबुक पेज और यूट्यूब पर भी देख सकते हैं। पेश है मानोरा से गोविंद सक्सेना की रिपोर्ट...।
300 सालों से निभा रहे हैं परंपरा
विदिशा जिले के मनोरा में तीन सौ साल पुराना भगवान जगदीश का मंदिर है। इस प्राचीन मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के श्रीविग्रह विराजमान हैं। यहां के हर घर में सभी जाति-धर्म के लोग एकजुट होकर भगवान का रथ खींचते हैं और मिलजुलकर इस उत्सव को मनाते हैं। जहां रथ यात्रा वाले दिन भगवान थोड़ी देर के लिए जगन्नाथ पुरी से खुद अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए मनोरा आते हैं। जगन्नाथ पुरी में आधिकारिक घोषणा होते ही मनोरा में खुशियों का माहौल बन जाता है और यहां भी वैसी ही रथ यात्रा शुरू हो जाती है।
भक्त को दिया था भगवान ने वचन
मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी रामनाथ सिंह बताते हैं कि यह मंदिर भगवान के भक्त और मनोरा के तरफदार मानिकचंद और देवी पद्मावती की आस्था का प्रतीक है। तरफदार दंपती भगवान के दर्शन की आकांक्षा में दंडवत करते हुए जगन्नाथपुरी चल पड़े थे। दुर्गम रास्तों के कारण दोनों के शरीर लहुलुहान हो गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इस पर भगवान स्वयं प्रकट हुए और उनको मनोरा में ही हर वर्ष दर्शन देने आने का वचन दे दिया। अपने भक्त को दिए इसी वचन को निभाने हर साल आषाढ़ सुदी दूज को रथयात्रा के दिन भगवान जगदीश मनोरा पधारते हैं और रथ में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं।
भगवान के मनोरा पहुंचने के संकेत
मंदिर के मुख्य पुजारी भगवती दास बताते हैं कि रथयात्रा से एक दिन पहले शाम को जब आरती के बाद भोग लगाकर भगवान को शयन कराते हैं तब मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। खास बात यह है कि दूसरे दिन सुबह जब मंदिर पहुंचते हैं तो पट अपने आप थोड़े से खुले मिलते हैं। जब रथ पर भगवान को सवार कराया जाता है तो अपने आप उसमें कंपन्न होता है अथवा वह खुद ही लुढ़कने लगता है। यही प्रतीक है कि भगवान मनोरा पधार गए। मुख्य पुजारी के मुताबिक उड़ीसा की पुरी में भी पंडा रथयात्रा के दौरान जब वहां भगवान का रथ ठिठककर रुकता है तो घोषणा करते हैं कि भगवान मनोरा पधार गए हैं।
मीठे भात का भोग लगता है
रथयात्रा ( rath yatra ) वाले दिन भगवान को पूरी पवित्रता के साथ बनाए गए मीठे भात का भोग लगाया जाता है। कई श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर भी भगवान को ये भोग अर्पित करते हैं। इस भोग को भक्त 'अटका' कहते हैं। यह मिट्टी की हंडियों में मुख्य पुजारी खुद तैयार करते हैं। जिसे भगवान को अर्पित करने के बाद भक्तों में बांटा जाता है। इसीलिए कहा जाता है कि जगन्नाथ का भात, जगत पसारे हाथ।
तन की सुधि नहीं, मन जगदीश के हवाले
इस मंदिर में हजारों श्रद्धालु मीलों दूर से दण्डवत करते हुए मानोरा पहुंचते हैं। रास्ते चाहे पथरीले हो, कटीले हो या कीचड़ से भरे हो, भक्तों की आस्था पीछे नहीं हटती है। दो-दो दिन पहले से ही लोग दंडवत करते हुए मानोरा पहुंचने लगते हैं। रास्ते भर जय जगदीश हरे की टेर लगाते चलते हैं।
तो विदिशा जरूर आइए
चारों धाम में से एक है उड़ीसा की जगन्नाथपुरी। आषाढ़ सुदी दूज पर यहां रथयात्रा और रथ में आरूढ़ भगवान जगदीश, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। लेकिन, पुरी में ये दुर्लभ दर्शन देखने सभी नहीं जा पाते हैं। जो श्रद्धालु पुरी तक नहीं जा पाते वे विदिशा के मानोरा आकर जगन्नाथपुरी की रथ यात्रा का पुण्य जरूर पाते हैं।
विदिशा के जिले में रथ यात्रा का क्या है महत्व, देखें वीडियो
दूर-दूर से रथयात्रा में शामिल होने आते हैं भक्त...।
Published on:
23 Jun 2020 12:48 pm
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