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Varanasi News : जूनियर हाईस्कूल के बच्चों ने NGO के मिड डे मील की खोल दी पोल, बोले – ज्यादातर खराब होता है टेस्ट, योगी अंकल से लगाई ये गुहार

Varanasi News : वाराणसी के आदमपुर जोन के 70 से अधिक विद्यालयों में भदोही का एनजीओ तरुण चाइल्ड सोसाइटी मिड डे मील पहुंचा रहा है। वहीं जैतपुरा के इस स्कूल छात्रों ने एनजीओ की जगह रसोइयों के हाथ के खाने को शुद्ध और टेस्टी बताया। बच्चों ने सीएम योगी आदित्यनाथ से गुहार भी लगाई है।

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Varanasi News : उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा पर जोर देती रही है। ऐसे में पूर्व की भांति ही योगी सरकार भी मिड डे मील पर जोर दे रही है ताकि बच्चों को पौष्टिक आहार मिले और वो मन लगाकर पढ़ाई कर सकें। योगी सरकार खाने को शुद्ध और उच्च क्वालिटी का करने के लिए कई एनजीओ को अब खाना बनाकर प्राइमरी स्कूल और जूनियर हाईस्कूल में पहुंचाने की जिम्मेदारी दी है, लेकिन इस खाने की गुणवत्ता को लेकर अब विद्यालय के छात्र मुखर हो गए हैं। कम्पोजिट विद्यालय में मिड डे मील की गुणवत्ता के लिए ptrika.com ने कम्पोजिट उच्च प्राथमिक कन्या विद्यालय जैतपुरा का निरीक्षण किया। पेश है खास रिपोर्ट...

मिड डे मील की ये है हकीकत

मिड-डे मील का रियलिटी चेक करने पहुंची टीम ptrika.com का विद्यालय के बच्चों ने गर्मजोशी से स्वागत किया तभी स्कूल की रसोइया ने आंगन में छोटे बच्चों के लिए टाट बिछाना शुरू किया। बच्चे आये और उसपर बैठकर खाने का इंतजार करना शुरू किया तभी रसोइया एनजीओ द्वारा लाया गया मेन्यू के हिसाब से मिक्सी सब्जी-दाल और रोटी के साथ चावल लेकर आईं। बच्चों को परोसा जाने लगा। एक-एक करके बच्चों को खाना मिला तभी चावल में कीड़ा निकाला जो चावला को लाल कर गया था। रसोइया बोलीं सरजी अक्सर निकलता है जिसे हम लोग हटा देते हैं।

बोले बच्चे, अक्सर निकलता है बाल और कंकड़-पत्थर

पत्रिका ने विद्यालय में पढ़ रहीं बच्चियों से मिड डे मील के बारे में जानकारी की। patrika.com से बात करते हुए कक्षा 8 की निक्की ने बताया कि कभी अच्छा आता है तो कभी खराब आता है। निक्की ने बताया कि पहले जब रसोइया आंटी बनती थीं तो वो देख के बनाती थीं और वो खाना टेस्टी होता था पर अब खाने में कंकड़ तो कभी बाल निकलता है। इसलिए यहां का खाना ही खाना छोड़ दिया है घर से टिफिन लेकर आते हैं। एक अन्य छात्र जहान्वी मौर्या ने बताया कि पहले आंटी जी अच्छा बनाती थीं पर एनजीओ से जो खाना आता है वो टेस्टी नहीं होता है।

खाने में निकलते हैं कीड़े-मकौड़े, योगी अंकल बदल दें व्यवस्था

अंशिका शर्मा भी कक्षा 8 में पढ़ती हैं। अंशिका ने बताया कि खाना यहां अच्छा आता है तो कभी कीड़े-मकौड़े निकलते हैं। इस सत्र में कुछ सुधार हो रहा है। लेकिन पहले जो रसोइयां आंटी जो खाना बनाती थीं वो अच्छा बनाती थीं। हमारी मांग है योगी अंकल से कि हमें अच्छा खाना मुहैया कराएं और जो पहले की व्यवस्था थी स्कूल में खाना बनने की उसे बहाल कर दें

NGO तरुण चाइल्ड सोसाइटी के जिम्मे है मिड डे मील

इस समबन्ध में patrika.com से बात करते हुए उच्च प्राथमिक कन्या विद्यालय, जैतपुरा के इंचार्ज प्रधानाध्यापक अनवार अहमद ने बताया कि हमारे यहां अभी 175 बच्चे हैं और उम्मीद है कि 190 हो जाएंगे क्योंकि अभी रजिस्ट्रेशन चल रहा है। उन्होंने बताया कि NGO तरुण चाइल्ड सोसाइटी यहां मिड डे मील मेन्यू के हिसाब से खाना देती है। अनवार अहमद ने बताया कि ऐसा नहीं है कि खाना हर दिन बढ़िया ही आता है कभी कभी खराब भी आता है जिसकी शिकायत भी मिलती है, लेकिन इसके पहले के सत्र में बहुत खराब खाना आता था पर जुलाई से खाना हमें बेहतर मिल रहा है।

पहले बच्चे शौक से खाते थे, पर अब नहीं

अनवार अहमद ने भी बच्चों की बात में सहमति जताई कि पहले जब रसोइयां यहां बनाती थीं तो सभी बच्चे चाव से खाते थे, लेकिन अब एनजीओ से बनकर आ रहा है। खाना कैसा है, कब का बना है इन सब शक की वजह से परिजन भी खाने नहीं देना चाहते हैं। अनवार ने कहा कि वाराणसी के कई स्कूलों को अक्षय पात्रा के किचन से मिड डे मील परोसा जा रहा है जिसकी तारीफ हो रही है। हमारी मांग है कि हमें भी वहां से परोसा जाए और हमने इस विषय में अधिकारियों को भी अवगत कराया है।

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