14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वसंत पंचमी पर चढ़ा बाबा विश्वनाथ का तिलक, महाशिवरात्रि को होगा विवाह

बंसत पंचमी के अवसर पर आज बाबा विश्वनाथ की पंचबदन रजत प्रतिमा का किया गया तिलकोत्सव ।

2 min read
Google source verification
बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव

बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव

वाराणसी. मौसम में वसंती बयार आई, मौसम सुहाना हुआ और श्रद्धालुओं ने जहां एक तरफ वाग्देवी की आराधना की तो वहीं बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव भी विधिविधान से संपन्न हुआ। विश्वनाथ मंदिर से कुछ ही कदम दूर स्थित पूर्व महंत डॉ कुलपति तिवारी के आवास पर ही पंचबदन रजत प्रतिमा का तिलकोत्सव किया गया। अब महाशिवरात्रि को धूम धाम से निकलेगी श्री काशी विश्वनाथ की बारात। यह बारात भी दुनिया भर में ऐतिहासिक है। यह कौमी एकता की मिशाल है। इसमें पार्वती हिंदू तो शिव मुस्लिम संप्रदाय से बनते हैं। बारात महामृत्युंजय महादेव से निकलती है और दशाश्वमेध घाट से पहले विश्वनाथ गली के समीप स्थित गुरु बृहस्पति मंदिर के समीप सजता है विवाह मंडप। वही होती है शादी। बारात में परंपरागत रूप से हर तरह के लोग व विभिन्न वेषधारी मौजूद रहते हैं जैसा कि लोकमान्यता में कहा गया है कि बाबा के विवाह में भूत-प्रेत, फकीर सभी शामिल हुए थे वह परंपरा आज भी काशी में पूरी की जाती है।

मान्यताओं के अनुसार वसंत पंचमी को बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव होता है तो महाशिवरात्रि को विवाह और रग भरी एकदाशी को मां पार्वती को वह गौने पर ले जाते हैं। इसी के तहत सोमवार बंसत पंचमी को परंपरनुसार विश्वनाथ मंदिर के मंहत आवास पर बाबा विश्वनाथ की पंचमुखी रजत प्रतिमा की विशेष पूजा की गई। लोकमान्यताओ के अनुसार शिवविवाह के पूर्व बंसत पंचमी के दिन दक्ष प्रजापती ने भगवान शंकर का तिलकोत्सव किया था।

परंपरानुसार दोपहर बारह बजे विश्वनाथ गली स्थित मंहत आवास पर बाबा की रजत प्रतिमा का पंचगव्य से स्नान कराया गया। फिर पांच वैदिक ब्राह्मणों अंकित भारती, जितेन्द्र शास्त्री, पवन शास्त्री, उदय शंकर त्रिपाठी, महेश शास्त्री ने विशेष पूजन किया। पूजनोपरांत बाबा कि प्रतिमा का विशेष श्रृंगार कर सांयकाल चार बजे पूर्व मंहत डॉ. कुलपति तिवारी ने तिलकोत्सव की औपचारिकता विधि विधान से पूरी की।

बाबा की रजत प्रतिमा का विजयायुक्त ठंडई, पंचमेवा, फल व मिष्ठान्न का भोग लगाया गया। उसके बाद आरती की गई। बाबा की इस रजत प्रतिमा की विशेष पूजा महाशिवरात्री तक चलती रहेगी? शिवरात्रि ?? पर शिव विवाह के उपरांत रंगभरी एकादशी पर माता उमा के साथ बाबा का गौना उत्सव मनाया जायगा और बाबा की रजत पालकी के दर्शन होगें।