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400 साल की परंपरा टूटी, पहली बार सोते हुए बाबा विश्वनाथ का हुआ दर्शन

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में पहली बार शयन आरती के बाद खुला रहा मंदिर, गर्भगृह के झरोखे से होता रहा दर्शन,अब तक सिर्फ महाशिवरात्रि की महानिशा में है पूरी रात भक्तों को मिलता रहा है प्रवेश।

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बाबा विश्वनाथ और भक्त

बाबा विश्वनाथ और भक्त

वाराणसी. काशी की प्राचीन परंराओं के साथ खिलवाड़ तो हो ही रहा था, अब श्री काशी विश्वनाथ के साथ भी अनोखा इतिहास रच दिया गया। विश्वनाथ मंदिर के 400 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि महाशिवरात्रि के लिए भक्तों की अपार भीड़ जमा हुई तो पिछली सारी परंपराओं को धता बताते हुए मंदिर प्रशासन ने रात की शयन आरती के बाद भी मंदिर को खुला रखा। गर्भगृह में बाबा सोते रहे और लोग गर्भगृह के झरोखे से दर्शन करते रहे।

बता दें कि अब तक महज महाशिवरात्रि को ही रात भर मंदिर खुला रहता था दर्शन-पूजन को। लेकिन इस दफा महाशिवरात्रि पर उमड़ी भक्तों की भीड़ को जब मंदिर प्रशासन नियंत्रित नहीं कर पाया तो पूरी रात के लिए मंदिर खोले रखने का निर्णय लिया। भीड़ के मद्देनजर यह निर्णय ले लिए जाने से काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जब 48 घंटो तक लगातार मंदिर मैं भक्तों का प्रवेश होता रहेगा।

कुंभ से भीड़ के पलट प्रवाह को देखते हुए रविवार को विश्वनाथ मंदिर प्रबंधन ने शयन आरती के बाद भी मंदिर को खोले रखने का निर्णय किया।

भक्तों की सहूलियत के लिए लेना पड़ा निर्णय

रविवार को पूरे दिन इतनी जबरदस्त भीड़ थी की कतार में लगे लोग मंदिर का पट बंद होने के समय तक भी दर्शन नहीं कर पाते। देश दुनिया के तमाम हिस्सों से आए आस्थावानों की आस्था को चोट ना पहुंचे एवं 08- 08 घंटे तक कतार में खड़े रहने के बाद उन्हें निराश ना होना पड़े इसलिए आपत्ति काल के विधान को अपनाते हुए शयन आरती के बाद भक्तों को झरोखे से दर्शन कर कराने का निर्णय किया गया। रोज की भांति शयन आरती के बाद गर्भगृह के चारों द्वार बंद कर दिए जाएंगे। भक्त इन दरवाजों पर बने झरोखों से बाबा की का दर्शन करते रहेंगे। -श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष पंडित अशोक द्विवेदी

बता दें कि रविवार की दोपहर में भी भीड़ को देखते हुए गर्भ गृह में प्रवेश रोक दिया गया था। भक्तों को झांकी दर्शन कराया जा रहा था हालांकि बहुत तेरे भक्तों ने झांकी दर्शन के बाद असंतोष व्यक्त करते हुए बाबा को जल चढ़ाने जल और दूध चढ़ाने की अपनी मनोकामना अधूरी रह जाने की शिकायत दर्ज कराई थी।

शयन आरती के बाद मंदिर में प्रवेश अनुचित

शयन आरती के बाद भी भक्तों को मंदिर में प्रवेश देना काशी विश्वनाथ मंदिर की परंपरा के विपरीत है।-मंदिर के महंत डॉ कुलपति तिवारी

बता दें कि महंत डॉ तिवारी विशेष अवसर पर रात्रि 2:30 बजे से ही मंगला आरती करने के औचित्य पर भी सवाल उठाया चुके हैं। यही नहीं मंगला आरती के दर्शन और उसके लिए टिकट की बिक्री का भी विरोध करते रहे हैं।-