
Varanasi Sawan Special
Sawan Special : महादेव की नगरी में सावन की धूम है। भक्त गंगा स्नान कर विश्वनाथ के दरबार में जल चढ़ा रहे हैं। पूरी काशी में बोल-बम के नारों से गूंज रही है। इसी के बीच भक्तों के बीच द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकाल के भी चर्चे हैं और यह चर्चा काशी में है। इसका कारण है काशी के प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट के पास मिलने वाले राजस्थानी कपड़ों के कुर्ते जिनपर महाकाल और महादेव की प्रिंट है। सावन में इनका क्रेज बढ़ गया है। हर वर्ग के लोग इस कुर्ते को लेने आ रहे हैं साथ ही विदेशी भी इसे खासा पसंद कर रहे हैं। काशी की दशाश्वमेध इलाके में स्थित शान्ति हैंडीक्राफ्ट पर इस समय इसकी डिमांड बढ़ गई है। ऐसे में patrika.com ने इस कुर्ते की सिलाई, कपड़े और इसकी लागत पर विस्तार से बात की। पेश है स्पेशल रिपोर्ट...
शान्ति हैंडीक्राफ्ट पर 17 सालों से कुर्तों का है क्रेज
दशाश्वमेध इलाके में शान्ति हैंडीक्राफ्ट के मालिक गोपाल यादव ने patrika.com बताया कि पिछले 17 साल से यह दुकान है। यहां पहले खादी का कुर्ता बिकता था जिसे विदेशी खरीदते थे। इसके अलावा महाकाल और ओम लिखे कुर्ते भी बिकते थे पर वो कम बिकते थे। कोरोना काल के बाद पर्यटन को धक्का लगा और विदेशी लोगों की आवजाही कम हुई। इधर विश्वनाथ कॉरिडोर बना और काशी में महादेव के भक्तों का रेला उमड़ा और काशी में महाकाल और ओम लिखे कुर्तों का मार्केट बूम कर गया।
क्वालिटी के लिए मंगाए राजस्थान से कपड़े
काशी में आस्था का सैलाब सावन में उमड़ता है। गोपाल ने बताया कि राजस्थान से स्पेशल कॉटन का प्रिंट किया हुआ कपड़ा मंगाया जाता है। काशी के मार्केट में मिलने वाले कुर्तों से ये काफी अलग है। राजस्थान से ही इसपर महाकाल, राम, ओम प्रिंट होकर आता है। उसे हम डबल स्टीच करवाकर सभी साइजों में कुर्ते सिलवाते हैं। हमारे कारीगर पूरी गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए इसे तैयार करते हैं।
पूर्वांचल और बिहार में है डिमांड
गोपाल यादव ने patrika.com को बताया कि इस कुर्ते की साल भर डिमांड रहती है और साल भर हम इसका व्यापार करते हैं। सावन में इसकी डिमांड बढ़ जाती है। यहां से ये प्रिंटेड कुर्ते लेने के लिए पूरे पूर्वांचल और बिहार से कस्टमर आते हैं और इसे लेकर जाते हैं। यहां एक कुर्ता हाफ स्लीव का 150 रुपए में और फुल स्लीव का 180 रुपए में मिलता है।
विदेशी भी हैं दीवाने
गोपाल यादव की दुकान पर पहुंची जर्मनी की रहने वाली कमला को भी ये कुर्ते बेहद पसंद हैं। उन्होंने औपचारिक बातचीत में कहा कि वह जर्मनी की रहने वाली हैं और पिछले 20 सालों से काशी में रह रहीं हैं। उन्होंने कहा कि वो जर्मनी की हैं और पर उनका दिल हिन्दुस्तानी है और उनका बाबा भोलेनाथ से काफी लगाव है।
Published on:
05 Jul 2023 06:44 pm
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