वाराणसी

Monsoon 2025: बस कुछ दिनों का इंतजार फिर बारिश की फुहार, इन महीने मानसून देगा दस्तक, किसान हो जाएं तैयार 

Monsoon Rain Prediction in UP: साल 2025 की गर्मी भले ही कुछ ज्यादा सता रही है लेकिन बस कुछ दिनों में ही बड़ी राहत मिलने वाली है। मौसम वैज्ञानकों के अनुसार  इस साल मानसून जल्दी दस्तक देने वाला है। आइए बताते हैं इस बार मानसून कब आएगा और धान की रोपनी कब शुरू कर देनी चाहिए ? 

2 min read
Apr 16, 2025
Monsoon 2025

Monsoon 2025 Prediction in Uttar Pradesh: साल 2025 में गर्मी भले ही परेशान कर रही है लेकिन मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार मानसून का बहार जल्दी होने वाला है। IMD के मुताबिक उत्तर भारत में मानसून के दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने वाली है। जून से सितंबर तक जमकर बारिश होने के आसार हैं। इससे किसानों को बड़ी राहत मिलने वाली है।

मौसम वैज्ञानिक ने क्या कहा ? 

IMD के प्रमुख मृत्यंजय महापात्रा ने कहा कि इस बार मानसून सबसे ज्यादा समय तक रहेगा। इस दौरान अल नीनो जैसे भी स्थिति नहीं होगी। भारत में अल नीनो के कारण ही मानसून कमजोर पड़ता है और सूखा पड़ता है। इस बार उत्तर प्रदेश में मानसून चार महीने यानी जून से सितंबर तक रहेगा और संभावना से अधिक बारिश होगी। 87 सेंटीमीटर के दीर्घकालिक औसत का 105 फीसदी होने के आसार हैं। 

किसान हो जाएं तैयार 

आमतौर पर उत्तर प्रदेश में धान की रोपनी जून जुलाई में शुरू हो जाती है। इसके लिए एक महीने पहले से खेत को तैयार किया जाता है। धान की खेती करने वाले किसान इस बार थोड़ी जल्दी खेत तैयार करें और समय से धान का बीज डाल दें ताकि दूसरी बारिश होते ही आसानी से रोपनी शुरू की जा सके। 

बारिश का जीडीपी से सीधा कनेक्शन 

देश में बारिश का सीधा कनेक्शन जीडीपी से है। भारत एक कृषि प्रधान देश है और मानसून का सीधा असर खेती पर पड़ता है। मानसून अच्छा रहना खेती के लिए बहुत जरूरी है। भारत में लगभग 42.3 % आबादी खेती पर ही निर्भर है। खेती भारत के कुल GDP में 18.2% का योगदान करता है। भारत में लगभग 50% खेती बारिश पर निर्भर है।   

कितनी बारिश होगी 

IMD के मुताबिक, अगर चार महीने के मॉनसून सीजन में औसतन 87 सेंटीमीटर बारिश होती है और यह मात्रा 96% से 104% के बीच रहती है, तो इसे "सामान्य बारिश" माना जाता है। यह औसत पिछले 50 वर्षों के आंकड़ों पर आधारित है।

साधारण भाषा में कहें तो, इस बार मॉनसून के अच्छे रहने की उम्मीद है। इससे किसानों को फायदा मिलेगा और पानी की किल्लत भी कम हो सकती है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम में बदलाव आ सकते हैं, इसलिए हमें हमेशा सतर्क रहना होगा। बारिश हर साल एक जैसी नहीं होती, इसीलिए जरूरी है कि हम पानी का सोच-समझकर और सही तरीके से उपयोग करें।

Also Read
View All

अगली खबर