
एप साइकिल सर्विस का मजा लेते विद्यार्थी
वाराणसी. शहर को पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त करने के लिए आईआईटी बीएचयू ने नई पहल की है। इसके तहत ऐसी साइकिल तैयार की गई है जिसे हासिल करने के बहुत भाग दौड़ करने की जरूरत नहीं, बस मोबाइल एप से बुकिंग करानी होगी। इस योजना का शुभारंभ आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो राजीव संगल ने मंगलवार को की। योजना के तहत किसी उपभोक्ता को यह साइकिल एक रुपये प्रति आधा घंटा की दर से उपलब्ध होगी।
शुभारंभ के मौके पर निदेशक प्रो. संगल ने बताया कि बंगलूरू की जूमकार कंपनी के सहयोग से आईआईटी बीएचयू से एप बेस्ड रेंटल साइकिल सर्विस शुरू की जा रही है। कंपनी की यह योजना पुणे में काफी लोकप्रिय है। विदेशों की तर्ज पर इसमे शहर में कहीं भी आने-जाने के लिए साइकिल किराए पर मिलेगी। साइकिल लेने, उसका किराया देने, उसे वापस जमा करने का पूरा सिस्टम हाईटेक और एप बेस्ड है। कंपनी की सभी साइकिल्स एडवांस मॉडल की गियर बेस्ड हैं। बीएचयू परिसर से शुरूआत के बाद कंपनी इसे जल्द ही वाराणसी सिटी में भी शुरू करने के लिए नगर निगम से बात कर रही है।
साइकिल की इस नई सर्विस का नाम पीईडीएल है। इसके लिए आईआईटी बीएचयू और जूमकार कंपनी के बीच 27 फरवरी को समझौता हुआ था। समझौते के तहत कंपनी शुरुआत में आधे घंटे के लिए एक रुपये चार्ज कर रही है। हालांकि यह रेट कुछ दिनों बाद अन्य शहरों की तरह हो जाएगा। कंपनी के एरिया बिजनेस मैनेजर गुंजित सिंह ने बताया कि कंपनी ने अभी बीएचयू परिसर के लिए पूरा प्लान बनाया है।
जूमकार की पीईडीएल सर्विस पुणे के अलावा कोलकाता, बंगलूरु, नई दिल्ली, जयपुर , हैदराबाद, मुंबई में लागू है। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र बनारस आठवां शहर है जहां पीईडीएल की सेवा उपलब्ध कराई गई है। आईआईटी निदेशक प्रो संगल ने बताया कि परिसर के पर्यावरण, यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की सेहत और दिन- प्रतिदिन बढ़ते ट्रैफिक लोड को नियंत्रित करने के लिए यह प्रयास किया गया है।
फर्स्ट फेज में जूमकार ने बीएचयू में 80 पीईडीएल साइकिल से शुरुआत की है। जिसे बढ़ाया जाएगा। कंपनी इन हाइटेक साइकिल्स को हैंडल करने के लिए कैंपस में ही एक ऑफिस भी खोल रही है। जिसमें छोटा सा वर्कशाप भी होगा ताकि साइकिल में खराबी आने पर उसे तत्काल ठीक किया जा सके।
कंपनी की सभी साइकिल्स यूनिसेक्स मॉडल की होंगी जिसमें लेडीज-जेंट्स दोनों चला सकेंगे। प्रत्येक साइकिल के फोर्क में डिजिटल लॉक होगा जो जूमकार एप के क्यूआर कोड के जरिये ही खुलेगा। हर साइकिल जीपीएस से लैस है। जिससे साइकिल की लोकेशन कंट्रोल रूम में ट्रैक होगी। सभी साइकिल्स में इंटरनेशनल गियर सिस्टम है। साइकिल के रेंट का पेमेंट पूरी तरह से डिजिटल होगा।
इस अवसर पर अधिष्ठाता (छात्र कार्य) प्रोफेसर बीएन राय ने बताया कि वर्तमान में जूमकार ने 35 साइकिल संस्थान में उपलब्ध करा दी है। अगले महीने लगभग 65 साइकिल और आ जाएगी। संस्थान के दस स्थानों पर दस-दस की संख्या में साइकिल उपलब्ध रहेगी। इसमें पांच स्थान हास्टल के पास और पांच स्थान शैक्षणिक क्षेत्र में चयनीत हैं। अगर यह व्यवस्था सफल रही तो भविष्य में साइकिल की संख्या और बढ़ाई जाएगी।
संस्थान के छात्र संसद के उपाध्यक्ष साईं तेजा रेड्डी ने बताया कि यह साइकिल पूरी तरह से जीपीएस तकनीकी पर आधारित है। प्ले स्टोर में जाकर मोबाइल एप जूमकार डाउनलोड करना होगा। एप में रजिस्ट्रेशन के पश्चात संस्थान में सभी साइकिल की लोकेशन मिलने लगेगी। पेटीएम से एक रुपये प्रति आधे घंटे के शुल्क जूमकार को भुगतान करने के बाद साइकिल पर उपलब्ध बारकोड मोबाइल से स्कैन करने पर साइकिल का ताला अपने आप खुल जाएगा। जिसे लेकर छात्र एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि जूमकार ने अपने इंजीनियर्स को संस्थान में तैनात किया है जो साइकिल में आने वाली तकनीकी समस्या और इसकी सुरक्षा के प्रति जरूरी कदम उठाएंगे।
Published on:
27 Mar 2018 05:16 pm
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