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पुत्र कामना को लगाई डुबकी

लोलार्क षष्ठी (ललई छठ) के पावन अवसर पर पुत्र प्राप्ति की कामना लिए लाखों निसंतान दंपतियों ने लोलार्क कुंड में डुबकी लगाई।

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Devesh Singh

Sep 07, 2016

lolark kund

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वाराणसी. लोलार्क षष्ठी (ललई छठ) के पावन अवसर पर पुत्र प्राप्ति की कामना लिए लाखों निसंतान दंपतियों ने लोलार्क कुंड में डुबकी लगाई। पुत्र कामना व पुत्र की सलामती की मुराद लिए लोलार्क कुंड पर श्रद्धालुओं की भीड़ मंगलवार की शाम से ही लगने लगी थी, और समय के साथ भीड़ बढ़ती ही रही। लोलार्क षष्ठी स्नान के लिए रात तक स्नानार्थियों की लंबी कतार लग गयी। कुंड में मंगलवार की रात से शुरू हुआ पुत्र कामना स्नान बुधवार को पूरे दिन चलता रहा। कोई पुत्र प्राप्ति के लिए तो कोई उसके सलामती के लिए तो कोई मुराद पूरी होने के बाद लोलार्क कुंड में डुबकी लगा रहा था। लोलार्क कुंड में डुबकी लगाने के लिए पूर्वांचल सहित देश के कई हिस्सों से श्रद्धालु आये थे।


लोलार्क कुंड में स्नान से होती है संतान प्राप्ति
ऐसी मान्यता है कि लोलार्क षष्ठी (ललई छठ) पर लोलार्क कुंड में स्नान करने से निसंतान दंपति को पुत्र की प्राप्ति होती है। इस कुंड में स्नान कर अनेक दंपतियों ने पुत्र सुख पाया है। इस मान्यता के चलते हर साल लोलार्क छठ पर इस कुंड में डुबकी लगाने वालों की भारी भीड़ होती है। ऐसी मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने वाले निरूसंतान दंपति स्नान के बाद कपड़े कुंड में ही छोड़ देते हैं। इस दौरान महिलाएं श्रृंगार आदि की सामग्री भी वहीं छोड़ती हैं। आधी रात को लोलार्क कुंड में सविधि पूजा व आरती के बाद स्नान प्रारंभ हो गया। इस कुंड में स्नान किए दंपत्तियों द्वारा छोड़े गए भारी मात्रा में कपड़ें जमा हो गये हैं।
पूरी तरह मुस्तैद रहा प्रशासन
पिछली बार की हुई दुर्घटना को देखते हुए इस बार प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। श्रद्धालुओं के साथ कोई हादसा से अनहोनी न हो जाये इसके लिए एनडीआरएफ की टीम लगाई गयी थी। भीड़ को काबू करने और व्यवस्था बनाने के लिए कुंड में स्नान करने के लिए दो तरफ से लाइन लगी थी। एक लाइन मुमुक्ष भवन से लगी थी तो वहीं दूसरी लाइन भदैनी, सोनापुरा की ओर से लगी थी। प्रशासन ने स्नान स्थल से लेकर बाहर सड़क तक और एक तरफ सोनारपुरा और दूसरी ओर मुमुक्षु भवन तक बैरिकेडिंग करके भीड़ नियंत्रित करने का काम किया।


लगभग दो लाख ने लगाई डुबकी
भदैनी स्थित इस कुंड में ललई छठ पर लगभग दो लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। मंगलवार की रात से पहले ही हजारों महिला श्रद्धालु सिर पर गठरी या कंधे पर झोला लादकर पहुंच गयी थीं। इस स्नान में पूर्वांचल ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से आस्थावान आते हैं।