
पार्षद राजेश जायसवाल (फाइल फोटो)
वाराणसी. हरदिल अजीज, मिलनसार, सच्चे समाजसेवी भाजपा पार्षद राजेश जायसवाल नहीं रहे। महीनेभर से बीमार थे। सरसुदर लाल चिकित्सालय में इलाज चल रहा था। पेट संबंधी दिक्कतों की वजह से अस्पताल में भर्ती थे। चिकित्सकों के अथक प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। गुरुवार की सुबह उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली।
राजेश ने थोड़े ही समय में कुशल समाजसेवक के रूप में अपनी अलग पहचान बना ली थी। उनका जीने का अंदाज भी सबसे ज़ुदा था। सोनारपुरा से आगे अग्रवाल रेडियो के समीप उनका आवास था। यहीं वह लोगों से मिलते, उनकी समस्या सुनते और उसके निराकरण में जुट जाते। राजेश हर जरूरतमंद के लिए हर पल उपलब्ध रहते थे। मोबाइल की घंटी बजी नहीं कि रिसीव होना ही है। अगर घर पर हैं, पूजा-पाठ में तल्लीन हैं तो अलग बात लेकिन उससे निबटने के बाद कॉलबैक जरूर करते। उनके दर पर जो गया, वह खाली हाथ नहीं लौटा। रात-बिरात जब चाहे लोग उनसे संपर्क साध सकते थे।
अभी कुछ ही घंटे पहले यानी बुधवार को ही राजेश से मिलने, उन्हें देखने के लिए एआईआईएमस नई दिल्ली से न्यूरोलॉजिस्ट प्रो मंजरी त्रिपाठी आई थीं। उस वक्त शहर उत्तरी के विधायक रवींद्र जायसवाल भी मौजू थे। सरसुंदर लाल चिकित्सालय के एमएस प्रो विजय नाथ मिश्र ने बताया कि राजेश को फेफड़े का कैंसर था। प्लीहा फट चुका था। चाहे जो हो लेकिन इस नई ऊमर में ऐसे सहृदयी समाजसेवी का जाना सभी को साल गया। ऐसे नेता कम ही मिलते हैं आज जिनका व्यक्तित्व दलीय बंधनों से ऊपर हो। ऐसे ही थे राजेश जायसवाल।
Published on:
01 Nov 2018 07:54 pm
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