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श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाया गया मां महा मैत्रायनी योगिनी का 28 वां निर्वाण दिवस

माताजी की समाधि पर दर्शन के लिए भक्तों की लगी कतार, गुरुपद संभव राम ने कहा कि मां महा मैत्रायणी योगिनी से ममता, करुणा, दया की प्रेरणा लेनी चाहिए

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Baba Gurupada Sambhav Ram ji

Baba Gurupada Sambhav Ram ji

वाराणसी. पड़ाव स्थित आश्रम में सोमवार को अघोर परिषद् ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष एवं अघोरेश्वर भगवान राम जी की जननी मां महा मैत्रायिणी योगिनी का 28 वां निर्वाण दिवस भक्ति व श्रद्धा से मनाया गया। माताजी की समाधि का दर्शन करने के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रही। बाबा गुरुपद संभव राजजी ने सबसे पहले अधोरेश्वर महाप्रभु की समाधि पर माल्यार्पण व पूजन आरती की। इसक बाद माताजी की समाधि पर विधि विधान से पूजन, आरती व हवन किया गया।
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बाबा गुरुपद संभव राम जी ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि सभी को मां महा मैत्रायणी योगिनी जी से ममता, करुणा, दया और सहनशीलता से प्रेरणा लेनी चाहिए। माताजी अपने आसपास आने-जाने वालों को अच्छा जीवन जीने की प्रेरणा देती थी। उन्होंने कहा कि नये विचारों व नई चीजों की तरफ मनुष्य आकर्षित होता है। लेकिन महापुरुषों की वाणियों और उनके संकलनों की तरफ बालक, युवा व बृद्धों का झुकाव कम होता जा रहा है। व्यर्थ की भागदौड़ से लोगों को फुर्सत नहीं है। हम उस दुर्लभ शांति, आनंद को भगवान-भगवती को, उस ईश्वर को कैसे प्राप्त करें। इस बारे में अवश्य सोचना चाहिए। बाबा गुरुपद संभव राम जी ने कहा कि व्यवसायिक शिक्षा से तो लोगों में मार-काट, छीना-झपटी व एक-दूसरे को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। जो आज समाज में सर्वत्र दुष्टिगोचर है। मैं यही निवदेन करुंगा कि अपने इस मानव जीवन को व्यर्थ न गवाएं। जीवन के सारे कार्यों को अच्छे से सम्पन्न करते हुए अपने मन और भावनाओं को ईश्वर की तरफ लगाये।
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