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हम निराला रचित "राम की शक्तिपूजा " के राम के साथ हैं अब तक देश भर में 46 मंचों पर खेले जा चुके इस नाटक में राम की भूमिका कोई पुरुष नहीं स्वाति विश्वकर्मा निभा रही हैं। बनारस के औसानगंज की यह लड़की आज हिंदी रंगमंच की दुनिया में एक जाना पहचाना नाम बन गई है |हम स्वाति यानि इस राम से उनके बारे में, निराला के भगवान् राम के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। स्वाति खुद चाय बनाकर लाती हैं और बातचीत का सिलसिला शुरू होता है।
स्वाति वैज्ञानिक बनना चाहती थी विज्ञान के विषयों में बहुत तेज ,लेकिन उनके गुरु मशहूर लेखक ,कवि आलोचक और रंगमंच निर्देशक व्योमेश शुक्ल ने एक बार कहा कि एक बार रंगमंच को स्पर्श करके देखो ,लेकिन उससे पहले हिंदी और हिंदी कविता को जानो,क्योंकि सिर्फ अभिनय के दम पर नाटक नहीं किये जा सकते।नतीजा यह हुआ कि पहले स्वाति ने हिंदी कविता को जाना फिर कामायनी ,रश्मिरथी और फिर "राम की शक्तिपूजा "।
स्वाति को रामकथा का सबसे अच्छा पात्र हनुमान लगता है ,उनका समर्पण उनकी मित्रता उन्हें भाती है हांलाकि इस अनुराग के पीछे एक दूसरी वजह यह भी है कि राम की शक्तिपूजा के हनुमान तापस उनके अच्छे मित्र हैं। स्वाति कहती है "मुझे पूरी उम्र राम की भूमिका निभानी पड़े तो भी मैं नही थकने वाली ,भगवान् राम ही मेरा निर्माण कर रहे हैं "।