नाचना: 20 गांवों की प्यास बुझाने वाले 14 जल स्रोत झेल रहे उपेक्षा का दंश

कभी नाचना गांव और आसपास के 20 गांवों की प्यास बुझाने वाले 14 परंपरागत कुएं अब अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

less than 1 minute read
Mar 31, 2025

कभी नाचना गांव और आसपास के 20 गांवों की प्यास बुझाने वाले 14 परंपरागत कुएं अब अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। करीब 50 साल पहले पानी की किल्लत को देखते हुए राजा और ग्रामीणों ने मिलकर इन कुओं का निर्माण करवाया था, लेकिन अब इनका रखरखाव न होने से ये जर्जर हो चुके हैं। गांव में घर-घर नल कनेक्शन मिलने के बाद इन पारंपरिक जल स्रोतों की अनदेखी शुरू हो गई। आज स्थिति यह है कि कुएं झाडिय़ों से घिरे हुए हैं और पानी की गुणवत्ता भी गिर चुकी है। यदि इन जल स्रोतों का पुनरुद्धार और नियमित देखभाल की जाए, तो गर्मी के मौसम और नहरबंदी के दौरान जल संकट से बचा जा सकता है।

नाचना क्षेत्र में गहरा रहा जल संकट

भले ही सरकार जल जीवन मिशन योजना के तहत हर गांव और ढाणी तक नल कनेक्शन पहुंचाने के लक्ष्य पर काम कर रही है, लेकिन नाचना क्षेत्र के कई गांवों में अब भी जल संकट बना हुआ है। दूर-दराज के गांवों, खासकर शेखों का तला गांव के निवासी, महंगे दामों में पानी के टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं।

पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण ही समाधान

ग्रामीण नरपत सिंह देवड़ा के अनुसार यदि इन प्राचीन कुओं का जीर्णोद्धार करवाया जाए और उनकी सफाई एवं देखभाल नियमित रूप से की जाए, तो जल संकट की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है। गर्मी के मौसम और नहरबंदी के दौरान इन जल स्रोतों का उपयोग करने से हजारों ग्रामीणों को लाभ मिलेगा।

Published on:
31 Mar 2025 10:20 pm
Also Read
View All

अगली खबर