उज्जैन

महाकाल में नेताओं का बोलबाला, आम भक्तों की 325 सीटें घटीं

उज्जैन के महाकाल मंदिर में प्रोटोकॉल और वीआईपी कल्चर का जमकर विरोध हो रहा है लेकिन व्यवस्थाएं बदल नहीं रहीं हैं। यहां राजनेताओं का वर्चस्व फिर बढ़ गया है। भस्म आरती में नेताओं का कोटा बहाल कर दिया गया है। बुरी बात यह है कि इससे आम जनता की सैंकड़ों सीटें कम हो गई हैं।

उज्जैनDec 08, 2023 / 12:16 pm

deepak deewan

महाकाल मंदिर में प्रोटोकॉल और वीआईपी कल्चर

उज्जैन के महाकाल मंदिर में प्रोटोकॉल और वीआईपी कल्चर का जमकर विरोध हो रहा है लेकिन व्यवस्थाएं बदल नहीं रहीं हैं। यहां राजनेताओं का वर्चस्व फिर बढ़ गया है। भस्म आरती में नेताओं का कोटा बहाल कर दिया गया है। बुरी बात यह है कि इससे आम जनता की सैंकड़ों सीटें कम हो गई हैं।

विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता के कारण भस्म आरती की परमिशन संख्या घटा दी गई थी, जो वापस बढ़ा दी है। इससे भस्म आरती में आम भक्तों की 325 सीटें घट गई हैं।

विधानसभा चुनाव के पहले आचार संहिता के कारण नेताओं को दी जाने वाली सीटें आम भक्तों जनता को दी जा रही थी। चुनाव बाद ये सुविधा वापस नेताओं को दे दी गई हैं। इसलिए आम जनता के पास वाली 325 सीटें कम हो गई हैं।

बता दें कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता 9 अक्टूबर को लागू की गई थी। तब मंदिर में राजनीतिक आधार पर होने वाली भस्म आरती अनुमति बंद कर दी गई थी। ऐसे में ऑनलाइन 325 सीट बढ़ गई थीं। आम भक्तों को ऑनलाइन अनुमति आसानी से उपलब्ध हो रही थी। अब 57 दिन बाद 5 दिसंबर को आचार संहिता खत्म होने के कारण इसमें बदलाव कर दिया है।

हालांकि लेटरपेड पर नाम वाला एक नियम अब भी नहीं हटा है। दरअसल, भस्म आरती में प्रोटोकॉल व्यवस्था के चलते आचार संहिता के दौरान सभी से लेटरपेड मांगे जा रहे थे, जैसे जिला जनसंपर्क कार्यालय, नेतागण, निजी कंपनी आदि। यह नियम अभी भी लागू है, जबकि आचार संहिता खत्म हो गई है। मंदिर समिति के जिम्मदारों से जब इस संबंध में चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि अभी ऊपर से आदेश नहीं आया है, जब तक आदेश नहीं मिलेगा, यह नियम लागू रहेगा।

भगवान महाकाल के दरबार में तड़के 4 बजे होने वाली भस्म आरती की परमिशन के लिए प्रोटोकॉल वालों से अब भी लेटरपेड पर नाम सील और साइन मांगे जा रहे हैं। संभवत: यह ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि ईयर एंडिंग और नए साल की पहली तारीख को अनुमति मांगने वालों से निजात मिल सके।

इन्हें मिलता है प्रोटोकॉल
मंदिर समिति की ओर से मंत्री, सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दल के प्रमुख पदाधिकारी, प्रिंट व इले. मीडिया, जनप्रतिनिधि के माध्यम से प्रोटोकॉल के तहत आने वाले अतिथियों के नाम से फिर प्रवेश मिलना शुरू हो गया है। मंदिर समिति ने यह व्यवस्था पुन: बहाल कर दी है।

हर साल की तरह इस साल भी इयर एंडिंग और नए साल पर जमकर भीड़ उमड़ने की संभावना है। यही वजह है कि फिलहाल मंदिर में लेटरपेड मांगा जा रहा है। भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के लिए लोगों ने अभी से जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया है जबकि ऑनलाइन परमिशन फुल हो चुकी है। एडवांस बुकिंग अब नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि मंदिर समिति द्वारा प्रोटोकॉल से जुड़े लोगों से परमिशन के बदले लेटरपेड मांग रही है।

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