उज्जैन

नियमों की धज्जियां उड़ा रहे जिम्मेदार : सख्त लॉकडाउन में बटी सम्मान निधि, 2000 रुपये लेने लंबी कतारों में लगे किसान

तस्वीर उज्जैन की एक तहसील से सामने आई है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यही हालात जिले की कुछ और भी तहसीलों के हैं, जहां सख्त लॉकडाउन के दौरान कोरोना की कतारें लगी हुई है।

उज्जैनMay 24, 2021 / 10:06 am

Faiz

नियमों की धज्जियां उड़ा रहे जिम्मेदार : सख्त लॉकडाउन में बांटी जा रही सम्मान निधि, 2000 रुपये लेने लंबी कतारों में लगे किसान

उज्जैन/ एक तरफ तो कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सरकार द्वारा कोरोना कर्फ्यू में 31 मई तक सख्ती बरतने के निर्देश जारी कर चुकी है। तो वहीं दूसरी तरफ सरकारी विभाग ही सीएम शिवराज और क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप द्वारा जारी दिशा निर्देशों की धज्जियां उड़ाता नजर आ रहा है। तस्वीर उज्जैन जिले की एक तहसील से सामने आई है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यही हालात जिले की कुछ और भी तहसीलों के हैं, जहां सख्त लॉकडाउन के दौरान कोरोना की कतारें लगी हुई है।

 

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आमजन को तो छोड़िये किसानों को भी नहीं था संक्रमण फैलने का डर

दरअसल, जिले के महिदपुर, उन्हेल और झारडा के बैंकों के सामने किसानों की भीड़ लगी है। वजह है, केन्द्र सरकार की ओर से दी गई किसान सम्मान राशि की रकम। रुपए लेने की होड़ में न तो लोगों में बीमारी का डर है और न ही कोरोना गाइडलाइन का पालन करने की फिक्र। ऐसे में सवाल ये है कि, सरकार द्वारा जिस राशि का वितरण किया जा रहा है। वहां ऐसे जिम्मेदार भी नहीं जो, इस अव्यवस्था को सुधारें। हालांकि, ये मामला 17-18 मई का है, लेकिन इसकी तस्वीरें रविवार को सामने आईं।


अगर संक्रमण फैला, तो क्या होंगे जिले के हालात?

सरकारी आंकड़ों पर गौर करें, तो शहर से ज्यादा संक्रमण की रफ्तार इस समय ग्रामीण क्षेत्रों की है। यहां बड़ी संख्या में लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। बावजूद इसके अनदेखी की ऐसी तस्वीर चिंता बढ़ाती है। शहर के पास ग्रामीण इलाकों में बैंकों के सामने लगी भीड़ लगी। आशंका है कि, अगर यहां से संक्रमण फैला, तो जिलेभर में वो किस तरह के हालात उत्पन्न कर सकता है। इस बात का अंदाजा भी सिर्फ जिम्मेदार ही लगा सकते हैं।


2000 रुपये लेने की फिक्र में खत्म हुआ कोरोना का डर

दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से किसान सम्मान निधि के तौर पर किसानों के खाते में 2000 रुपए डाले गए हैं। गेहूं उपार्जन के बाद किसानों को जैसे ही खबर लगी, तो वो बैंकों में आई अपनी जमा राशि लेने उमड़ पड़े। उन्हेल के 56 गांवों, महिदपुर और झारड़ा के अलग-अलग ग्रामीण इलाकों से किसानों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा पर पहुंच गई। ठसा ठस भीड़ में खड़े ग्रामीण कोरोना से होने वाले नुकसान को ही भूल गए।

 

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कुछ जागरुक लोगों ने कतार में खड़े होने के बजाय रख दिये थे चप्पल और पत्थर

जिला सहकारी बैंक के मैनेजर महेंद्र कुमार जाटव के मुताबिक, इस संबंध में हिदायत दी जा रही थी, बावजूद इसके कोई भी मानने को तैयार नहीं था।बैंक के बाहर दिनभर भीड़ रहती है। हालांकि, भीड़ को नियंत्रण में करने के लिये अब टोकन सिस्टम शुरु कर दिया गया है। हालांकि, रुपये लेने आ रहे कुछ लोगों में इतनी जागरूकता देखने को मिली कि, कतर में खुद लगने के बजाय उन्होंने अपने नंबर पर अपनी चप्पलें या पत्थर को निशानी के तौर पर रख दिया था। फिलहाल, ये हालात अधिकांश ग्रामीण इलाकों के हैं। अगर इनपर अब भी गौर नहीं किया गया, तो आने वाले समय में ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर कोरोना विकराल हो चलेगा। अगर ऐसा हुआ, तो क्या सम्मान निधि के 2 हजार रुपयों को इसका जिम्मेदार माना जाएगा?

 

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