
उदयपुर. घटते भूजल स्तर को सुधारने और बारिश के पानी के संरक्षण के लिए सरकार की ओर से अनिवार्य किए गए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की धज्जियां उड़ रही है। भवन अनुमति के समय हर कोई अमानत राशि जमा करवाकर स्वीकृति ले रहा है, लेकिन कोई भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा रहा है। नियमानुसार भवन मालिक को वाटर हार्वेस्टिंग लगातार फोटो सहित निगम में पेश कर राशि लेनी होती है, लेकिन कोई भी भवन मालिक फोटो लेकर निगम नहीं पहुंचता।
निगम अधिकारियों का कहना है भवन निर्माण स्वीकृति के दौरान वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की अनिवार्यता है, लोग इसको लेकर बैंक गारंटी भी देते हैं। हकीकत में इसे कोई नहीं मंगवाता, जबकि पानी को सहेजने व पानी की शुद्धता के लिए यह सिस्टम काफी कारगर है। चंद रुपए बचाने के लिए कोई भी इसका उपयोग नहीं करते।
- छत का पानी पाइप से सीधा ट्यूबवेल में
यह तरीका बड़ी छत की इमारतों में काम में लिया जाता है। अभी बारिश का पानी सीधा ड्रेनेज में जाता है। हार्वेस्टिंग में पानी ट्यूबवेल की साफट में पहुंचेगा और बीच में फिल्टर कर पानी साफ करेगा। इसमें पाइप सहित कुछ खर्च करीब 7 से 8 हजार के करीब आता है।
- दस-दस फीट के दो गड्ढे बनाना
10 फीट के दो गड्ढ़े कर उसमें बड़ी गिट्टी, मुरमख् रेत की परत बनाकर पानी छोड़ा जाता है। इससे मिट्टी में पानी आता है और पानी का लेवल बरकरार रहता है।
- 4 गुणा 4 के गड्ढे का पिट तैयार करना
इसमें 4 फीट लंबे, गहरे और चौड़ेे गड्ढे करने का है। इसमें मशरू बोल्डर, गिट्टी, मुरम, रेत डालना पड़ती है। खर्च पांच से सात हजार रुपए पड़ता है। इसमें नीचे काली मिट्टी रह गई तो पानी जमीन में नहीं जाएगा।
-छत का पानी लाकर कुएं में छोडऩा
इस विधि में छत या आसपास का सारा पानी लाकर सीधे कुएं में छोड़ा जाता है। जहां कुआं हैं, वहां पानी पहुंचाने से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। चारों विकल्प में यह सबसे अच्छा और सस्ता विकल्प है। इसमें सिर्फ पाइप का ही खर्च आता है।
Published on:
02 Apr 2025 11:24 pm
बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
