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केवड़ा की खुशबू से फिर महकेगी, केवड़ा की नाल

- जायका के दल ने केवड़ा को माना विशेष प्रजाति, संरक्षण के साथ होगा शोध

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केवड़ा की खुशबू से फिर महकेगी, केवड़ा की नाल

केवड़ा की खुशबू से फिर महकेगी, केवड़ा की नाल

उदयपुर. जापान की जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (जायका) के दल ने दूसरे दिन बुधवार काे केवड़ा की नाल का निरीक्षण किया। दल के सदस्यों ने यहां माइक्रो रिजर्व प्लांट को देखा और केवड़ा के बारे में जानकारी ली। जायका ने केवड़ा को विशेष प्रजाति मानते हुए इसे बचाने और शोध के लिए चुना गया है।

बता दें कि केवड़ा की नाल में एक समय केवड़ा काफी फलता-फूलता था। यहां अब केवड़ा के पौधे काफी कम बचे हैं। दल के साथ सीसीएफ आरके खेरवा, सीसीएफ आरके सिंह, डीएफओ मुकेश सैनी, जायका अधिकारियाें के भारतीय कंसल्टेंट, जीवी रेड्डी आदि माैजूद थे।
जायका के साथ राजस्थान फोरेस्ट्री एंड बायोडावर्सिटी कंजर्वेशन प्रोजेक्ट (आरएसबीसीपी) के तहत कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। वन विभाग के सांझे में चल रही योजनाओं का दल ने निरीक्षण किया। उल्लेखनीय है कि इस दल ने कुंडेश्वर में ऐतिहासिक बरगद का पेड़ देखने के साथ ही गोगुंदा में जायका के साथ चल रहे बांस संरक्षण कार्यक्रम की प्रगति भी देखी। इसके बाद दल उदयपुर से भेजी गए योजनाओं के प्रस्तावों पर विचार करेगा और इनमें से चयनीत योजनाओं को जायका में लेने के लिए प्रस्तावित करेगा।


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