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मनुष्य जीवन में दो यात्राएं करता है, एक प्रेय की और दूसरी श्रेय की : आचार्य शिव मुनि

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JAIN SOCIETY

मनुष्य जीवन में दो यात्राएं करता है। एक प्रेय की और दूसरी श्रेय की : आचार्य शिव मुनि

उदयपुर. आचार्य शिव मुनि ने महाप्रज्ञ विहार में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में दो यात्राएं करता है। एक प्रेय की और दूसरी श्रेय की। प्रेय वह जो मन व इन्द्रियां चाहे। प्रेय संसार में मन बुद्धि और इन्द्रियों की यात्रा है। मन हमेशा पानी की तरह होता है। पानी हमेशा उपर से नीचे की ओर जाता है। उसी तरह मन भी उपर से नीचे की ओर जाता है। मन का सुख तो क्षणिक होता है। मंत्री शिरीष मुनि ने कहा कि अक्सर ध्यान करते समय विचारों में उलझ जाते हो, मन चंचल होता है। वह उलझा ही देता है, लेकिन ध्यान का महासूत्र भी है कि आप ध्यान की मुद्रा में हो आप संसार से मुक्त हो जाओ।

सबसे बड़ा धन संतोष
हुमड़ भवन में प्रात:कालीन धर्मसभा में सुमित्र सागर महाराज ने कहा कि जीवन का सबसे बड़ा धन सन्तोष है। कहते हैं सन्तोषी सदा सुखी। सन्तोषी व्यक्ति का कोई भी शत्रु नहीं होता। उसके मन में कभी किसी चीज का लालच नहीं होता। धैर्य और समता से जीवन सुखी और आनन्दित होता है। लोभ और स्वार्थ कुछ समय तो मनुष्य को आनन्दित कर सकता है लेकिन उसके दूरगामी परिणाम बड़े खतरनाक होते हैं। सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत ने बताया कि 10 अक्टूबर से नवरात्रि पर्व को लेकर जिन सहस्त्रनाम विधान आयोजित होगा।

शुरू हुई ज्योतिष कक्षा
आयड़ तीर्थ पर आचार्य यशोभद्र सूरिश्वर की निश्रा में सोमवार से ज्योतिष कक्षा का शुभारंभ हुआ। महासभा के मंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि सोमवार को आचार्य की निश्रा में ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, मुहुर्त शास्त्र की क्लास आरम्भ हुई, जिसमें 60 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। क्लास प्रतिदिन सुबह 9.30 से 11 बजे तक चलेगी।

परीक्षा व तैयारी का तालमेल
जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में आराधना भवन में वर्षावास कर रहे पन्यास प्रवर श्रुत तिलक विजय ने सोमवार को धर्मसभा में कहा कि इस जीवन को पूरा करके हम जहां जाएंगे। वहां हमें परीक्षा किसकी देनी है और अभी तैयारी जो कर रहे हैं। कपड़े कितने महंगे थे ये नहीं पूछा जाएगा।

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बंद होना चाहिए शोषण
भारतीय चिंतकों ने जो दृष्टि व दर्शन हमें दिया है। उसका स्पष्ट संदेश है कि प्राकृतिक संसाधनों का शोषण बंद होना चाहिए। उक्त विचार ऋषभ भवन में आयोजित राष्ट्रीय प्राकृत संगोष्ठी के समापन समारोह में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के गुणवंत सिंह कोठारी ने व्यक्त किए।
संगोष्ठी संयोजक डॉ. सुभाष कोठारी ने बताया कि प्राकृत स्कॉलर्स सोसायटी, समता युवा संस्थान एवं आयड़ वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता पुष्पेंद्र परमार ने की। बतौर अतिथि रमन कुमार जैन, नरेंद्र तलेसरा, ऋषभलाल मेहता, पुष्पेंद्र बड़ाला, बलवंत सिंह कोठारी, राजेश नाहर ने विचार व्यक्त किए। मुनि प्रेमचंद ने आर्शीवचन दिए।

धार्मिक आयोजन का समापन
शांतिनाथ दिगम्बर जैन कांच मंदिर अशोक नगर में पयुर्षण पर्व के समापन पर तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का सोमवार को समापन हुआ। इससे पहले सांस्कृतिक आयोजनों में श्रेष्ठ रहे प्रतियोगियों को मंच से सम्मानित किया गया। रविवार सुबह पंचामृत अभिषेक के बाद श्रीजी को चांदी की रजत पालकी में विराजमान कर शहर में शोभायात्रा निकाली गई। इसमें समाजजनों ने बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी निभाई। इसी तरह अन्य आकर्षक आयोजन हुए।


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