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video: ईंट भट्टों पर दम तोड़ता मासूम बचपन

- तेज धूप में पत्रिका पहुंचा उमरड़ा स्थित भट्टों पर - धडल्ले से हो रहा बालश्रम-कोई रोकने वाला नहीं  

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ईंट भट्टों पर दम तोड़ता मासूम बचपन

ईंट भट्टों पर दम तोड़ता मासूम बचपन

भुवनेश पण्ड्या

उदयपुर. तपती धूप और तम तोड़ मजदूरी। किसी एेसे व्यक्ति के लिए भले ही मजबूरी हो सकती है, जिसका परिवार दो जून की रोटी चाहता हो, लेकिन यहां बात एेसे बच्चों की हैं, जो ठीक से दुनियादारी भी नहीं समझे। ये बच्चे चंद सिक्कों की चाह में दिन भर ईंट भट्टों पर हाड़ तोड़ मेहनत करते हैं। बालश्रम रोकने के नाम पर हर किसी का मुंह चिढ़ाते तमाम कानून कायदे यहां यानी इन भट्टों के समीप आकर हांफने लगते हैं। शहर से चंद किलोमीटर दूर उमरड़ा में नियमों को ताक में रख बच्चों का बचपन इन ईंट भट्टों से निकलते धुएं में घुल हवा हो रहा है।

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ऑन द स्पॉट: पत्रिका टीम शनिवार दोपहर उमरड़ा के इन ईंट भट्टों पर पहुंची। यहां प्रशासन की नाक के नीचे खुले में बाल श्रम का धंधा पल रहा है। बेरोकटोक यहां बिहार, उत्तर प्रदेश सहित जिले के दूर दराज के झाड़ोल फलासिया क्षे से आए आदिवासी बच्चे काम कर रहे हैं, वे यहां मिट्टी खोदकर लाने से लेकर उसे ईंट भट्टों के सांचे में ढ़ालने और उसे पकाने तक का काम कर रहे हैं। ये बच्चे यहां बकायदा तेज धूप में ईंट भट्टों से ईंटे उतारते हुए पत्रिका के कैमरे में कैद हुए।

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- पत्रिका टीम पहुंची तो बंद किया काम: जैसे ही पत्रिका टीम उमरड़ा के एक ईंट भट्टे पर पहुंची तो कैमरा देखते ही सभी ने काम बंद कर दिया और वे मालिक सहित दौड़कर एक पेड़ की छांव के नीचे पहुंच गए। यहां पर बकायदा एेसे नाबालिग बच्चों मिले जिनके हाथ ईंटे उठाकर लाल हो चुके थे। मासूम चेहरे से टपकता पसीना कई कहानियां दिखा रहा था। भट्टा मालिक मदन ने बताया कि वे कई सालों से यहां काम कर रहे हैं, ये बच्चे उनके रिश्तेदार हैं, छुट्टियों में आए हैं तो मदद कर रहे हैं। एक अन्य मालिक बंशीलाल ने बताया कि वे शहर से कई साल पहले यहां आ गए हैं, खुद की जमीन खरीद ये धंधा कर रहे हैं। एक बच्चे ने अपना नाम मगनलाल बताया, लेकिन इससे अधिक वह कुछ बोल नहीं पाया। काम कर रही एक नाबालिग रेखा ने बताया कि वह सातवीं कक्षा में पढ़ती है, लेकिन स्कूल का नाम नहीं बता पाई।

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- एक अन्य ईंट भट्टे पर तेज धूप में बड़ों के साथ बच्चे ईंटे उतारते नजर आए। इसके पास एक अन्य भट्टे के मालिक तेजपाल से पूछा तो उसने बताया कि उनके यहां कोई बच्चा काम नहीं करता, जो बच्चे दिख रहे हैं, वे केवल खेलने आए हैं।

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कई बार परिवार वालों के साथ एेसे बच्चे हाथ बंटाते हैं, कई बार बाल श्रमिक नियोजित कर लाए जाते हैं। हम जल्द ही इस स्थिति को देखते हुए कार्रवाई करेंगे।

सज्जाद अहमद, लेबर इंस्पेक्टर उदयपुर


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