
असभ्यता की ‘धूल’ से सनी आहाड़ सभ्यता, पुरा संपदा स्थल बना खुला शौचालय
उदयपुर . करीब 4 हजार साल पुरानी आहाड़ सभ्यता पर प्रशासनिक और पुरातत्व विभाग की अनदेखी से खतरा मंडरा रहा है। आहाड़ सभ्यता के टीले पर झाड़-झंखाड पर उग आए है, जिनकी आड में ये इन दिनों खुले शौचालय में तब्दील हो रहे हैं। आयड़ नदी के किनारे धूलकोट चौराहे से सटे टीलों में इस सभ्यता के अवशेष छिपे हुए हैं। एक टीले को तो पुरातत्व विभाग ने कुछ हद तक सहेजा है, जबकि दूसरा शुरू से ही उपेक्षित है। महासतिया के पास मौजूद टीले को चारदीवारी बनाकर सुरक्षित करने का दावा किया जा रहा है। विभाग की मानें तो दूसरे टीले की देखरेख के लिए उनके पास बजट का अभाव है।महासतिया के करीब टीले का कच्ची बस्ती में रहने वाले लोग खुले शौचालय के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इस टीले के समीप ही बालिका सीनियर सैकंडरी स्कूल भी है। इस सुनसान क्षेत्र में उपद्रवी लोगों का भी जमघट लगा रहता है।
बनाए हैं प्रस्ताव
टीले की सार-संभाल को लेकर विभाग स्थानीय प्रशासन और नगर निगम को पूर्व में अवगत करवा चुका है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किए हैं। बजट मिलते ही चारदीवारी पर तारबंदी कर देंगे। — विनीत गोदाल, अधीक्षक, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, उदयपुर संभाग
Published on:
12 Jan 2019 04:29 pm
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