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अब फिर से बिगडऩे लगे गोशालाओं के हालात, जिम्मेदारों का नहीं ध्यान, पड़ी खाली

खाली पड़ी गोशालाएं।

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खाली पड़ी गोशालाएं।

खाली पड़ी गोशालाएं।

पानी छोड़ चारा और गायों का बना टोटा, जबकि २० रुपए की जगह ४० प्रति नग दी जा रही गाय को खुराक

टीकमगढ़. जिले में ग्रामीण एवं पंचायत विभाग द्वारा १०५ के करीब गोशालाएं स्वीकृत की गई है। पिछले छह महीने तक ५५ से अधिक पूर्ण हो चुकी है और १३ के करीब निरस्त कर दी गई है। गोशालाओं में रहने वाली गायों को २० रुपए प्रति नग की जगह शासन ने ४० रुपए देने की घोषिणा भी की है। इसके बावजूद गोशालाएं खाली पड़ी है। जबकि हर वर्ष संचालन के लिए संचालक को बजट दिया रहा है।


पलेरा और जतारा जनपद पंचायत की गोशालाएं नाममात्र के लिए चलाई जा रही है। इनका संचालन करने वालों को शासन की ओर से हर वर्ष बजट दिया जा रहा है। बावजूद चारा, भूसा का स्टॉक भी खत्म दिखाई दे रहा है। उनमें रहने वाली गाय तो पंचायत के रजिस्टर में दर्ज है, लेकिन गोशाला में दिखाई नहीं दे रही है। यह स्थिति ग्राम पंचायत मांची, लार खुर्द, शाहपुरा, टानगा, रामनगर, पलेरा विकासखंड की ग्राम पंचायत सिमरा खुर्द, निवौरा, टीला नरेनी, गोवा, रतवास के साथ अन्य में देखने को मिल रही है।

पानी छोड़ गाय और चारा गायब
बताया गया कि इन गोशालाओं में गायों के लिए पानी तो पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन चारा और भूसा की समस्या बनी है। चारा की बोवाई के लिए छोड़ी गई जमीन का संचालक द्वारा उपयोग नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण गोशालाएं खाली पड़ी है। निरीक्षण के दौरान ही संचालकों द्वारा गायों को गोशालाओं में रखा जाता है।

कलेक्टर और जनपद पंचायत सीईओ ने संचालन के दिए थे निर्देश
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय और जतारा एवं पलेरा जनपद पंचायत सीईओ सिद्ध गोपाल वर्मा ने एक सप्ताह पूर्व सरपंच और सचिवों की बैठक ली थी। खाली पड़ी गोशालाओं को चालू किए जाने के निर्देश दिए थे। लेकिन उनके निर्देशों का पालन नहीं किया गया। बैठक में संचालकों का कहना था कि बीते तीन महीने से गोशालाओं का संचालन बजट के कारण बंद हो गया है।

इनका कहना
गोशालाओं संचालन, चारा, भूसा और गायों को रखने के निर्देश दिए गए है। जिम्मेदारों द्वारा अगर गोशालाओं के संचालन में लापरवाही की जा रही है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
सिद्धगोपाल वर्मा, सीईओ जनपद पंचायत जतारा एवं पलेरा।