टीकमगढ़. प्राकृतिक खेती को बढावा देने और आर्थिक स्थिति से कमजोर किसानों की फसलों की उपज बढ़ाने के लिए मुफ्त में दवा और यूरिया खाद का वितरण युवा द्वारा किया गया है। जिससे किसानों को साहूकारों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। इसके साथ ही नकद की खेती करने के लिए प्रेरित किया गया है।
पहाड़ी तिलवारन, नचनवारा, जुडावन, बृजपुरा के साथ अन्य गांव के आर्थिक स्थिति से कमजोर किसानों को चिन्हित किया गया। वह किसान सामने आए जिन्होंने रबी फसलों को पानी तो दे दिया, लेकिन पोषक तत्वों को बढ़ाने के लिए खाद नहीं डाला गया। जिससे खेती खराब दिखाई देने लगी। इस स्थिति को देख देवेंद्र यादव ने यूरिया और नीदा नाशक दवाओं को खरीदा। उसके बाद चिन्हित कि सानों को वितरण किया गया।
यूरिया और दवा खरीदने साहूकारों के लगा रहे चक्कर
पहाड़ी तिलवारन, नचनवारा, जुडावन, बृजपुरा के नरेंद्र पाल, रामदयाल राय, बृजेेश पाल, भगवानदास, पुष्पेंद्र बघेल और प्रभू चढ़ार ने बताया कि खरीफ फसलें बारिश के कारण खराब हो गई थी। जिसके कारण फसल से नुकसान उठाना पड़ा। मजदूरी की और रकम को जोड़कर डीएपी खाद, बीज खरीदा और जुताई करवा ली, लेकिन यूरिया और दवाओं को खरीदने के लिए परेशान होना पड़ रहा था। उसकी पूर्ति के लिए साहूकारों के चक्कर लगा रहे थे। उस स्थिति को देखकर सेवक देवेंद्र यादव ने यूरिया और दवाओं को खरीदकर उनका वितरण मुफ्त में कर दिया।
प्राकृतिक खेती के लिए किया जागरूक
देवेंद यादव ने बताया कि डीएपी और यूरिया खाद से जमीन कठोर होती जा रही है। उसके बाद भी किसान उसका उपयोग कर रहे है। अगली बार से प्राकृतिक और नकद की खेती करने के लिए किसानों को जागरूक किया है।
यूरिया और दवा खरीदने साहूकारों के लगा रहे चक्कर
पहाड़ी तिलवारन, नचनवारा, जुडावन, बृजपुरा के नरेंद्र पाल, रामदयाल राय, बृजेेश पाल, भगवानदास, पुष्पेंद्र बघेल और प्रभू चढ़ार ने बताया कि खरीफ फसलें बारिश के कारण खराब हो गई थी। जिसके कारण फसल से नुकसान उठाना पड़ा। मजदूरी की और रकम को जोड़कर डीएपी खाद, बीज खरीदा और जुताई करवा ली, लेकिन यूरिया और दवाओं को खरीदने के लिए परेशान होना पड़ रहा था। उसकी पूर्ति के लिए साहूकारों के चक्कर लगा रहे थे। उस स्थिति को देखकर सेवक देवेंद्र यादव ने यूरिया और दवाओं को खरीदकर उनका वितरण मुफ्त में कर दिया।
प्राकृतिक खेती के लिए किया जागरूक
देवेंद यादव ने बताया कि डीएपी और यूरिया खाद से जमीन कठोर होती जा रही है। उसके बाद भी किसान उसका उपयोग कर रहे है। अगली बार से प्राकृतिक और नकद की खेती करने के लिए किसानों को जागरूक किया है।