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स्वतंत्रता दिवस पर विशेष : आर्थिक नगरी को मिली सेना के तीनों अंगों की विरासत

- सूरत सहेजेगा शौर्य-बलिदान की यादें जहाज और टैंक को - थल सेना और वायुसेना के विमान, टैंक के बाद अब मिलेगा नौसेना का युद्ध पोत

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स्वतंत्रता दिवस पर विशेष : आर्थिक नगरी को मिली सेना के तीनों अंगों की विरासत

सूरत.

सूरत भारतीय सेना के तीनों अंगों की ऐतिहासिक निशानियों को सहेजेगा। वायुसेना

की ओर से मिग-23 और थल सेना की ओर से टैंक टी-55 सूरत को पहले ही मिल चुके

हैं। अब नौसेना की ओर से युद्घ पोत मिलने वाला है। यह पोत मिलने के बाद संभवत:

सूरत राज्य का पहला शहर होगा, जहां शहीदों की यादें और तीनों सेनाओं की शौर्य गाथाएं

इन ऐतिहासिक जहाजों तथा टैंक से जीवंत बनी रहेंगी।


भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध में भारत की जीत हुई थी और बांग्लादेश

अस्तित्व में आया था, जो पहले पूर्वी पाकिस्तान था। इस युद्ध में हिस्सा लेने वाले वायुसेना

के मिग-23 को सूरत के सरथाणा में सजा कर रखा गया है। 1999 में कारगिल युद्ध के

दौरान सूरत के कानजी भालाला ने जय जवान नागरिक समिति बनाई थी। इस समिति की

ओर से युद्ध में शहीद हुए जवानों को सम्मानित किया गया था। गुजरात में 2001 में आए

भूकंप में कच्छ-भुज में काफी जानें गई थीं। इनमें सेना के 32 जवान शामिल थे। क

ानजीभाई ने बताया कि जय जवान नागरिक समिति की ओर से तब सूरत में एक कार्यक्रम

का आयोजन किया गया था। इसमें वायुसेना के एयर मार्शल वी.के.भाटिया को मुख्य

अतिथि थे। शहीद जवानों के परिवारों को इस कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। सूरत के

इस जज्बे को देखते हुए एयर मार्शल ने सूरत को मिग-23 देने की घोषणा की थी। यह

विमान जामनगर के एयर बेस से सूरत लाया गया था।

कतारगाम में टी-55 टैंक


जय जवान नागरिक समिति की ओर से शहीद जवानों के परिजनों को सम्मानित किया

जाता है। समिति अब तक 233 शहीदों के परिजनों को सम्मानित कर चुकी है। इन

परिवारों को समिति की ओर से चार करोड़ रुपए से अधिक की सहायता दी गई। समिति ने

शहीदों को सम्मानित करने के लिए दो साल पहले एक कार्यक्रम किया। इसमें थल सेना के

ब्रिगेडियर बी.एस. मेहता मुख्य मेहमान थे। वह भी शहीदों को सम्मानित करने के कार्यक्रम

से प्रभावित हुए। उन्होंने शहर के टैंक देने का वादा किया। इस बार सूरत को 1971 के

युद्ध में हिस्सा ले चुके टी-55 टैंक की सौगात मिली। इसे पुणे के आर्मी बेस कैम्प से सूरत

लाया गया और कतारगाम के आंबातलावड़ी में रखा गया।

नौसेना के पोत का इंतजार


शहर में हाल ही जय जवान नागरिक समिति की ओर से शहीदों के सम्मान में कार्यक्रम

आयोजित किया गया। इसमें इंडियन कोस्ट गार्ड के डायरेक्टर जनरल राजेन्द्र सिंह मुख्य

अतिथि के तौर पर उपस्थित थे। शहर को वायुसेना और थल सेना के युद्ध विमान तथा टैंक

की सौगात मिलने के बारे में पता चलने पर जनरल सिंह ने शहर को नौसेना की ओर से

युद्ध पोत देने की घोषणा की। इस पोत को हासिल करने के लिए समिति ने प्रयास शुरू कर

दिए हैं। कानजी भालाला ने बताया कि पोरबंदर के समुद्र में एक पोत खड़ा है, जिसने कई

युद्ध और ऑपरेशन में हिस्सा लिया है। इसे हासिल करने की प्रक्रिया जारी है। शायद

दिसम्बर तक यह पोत शहर को मिल जाएगा। इसके मिलने के साथ ही सूरत राज्य का

पहला ऐसा शहर बन जाएगा, जिसके पास सेना के तीनों अंगों के युद्ध जहाज और टैंक होगे।