
GST
सूरत. कपड़ा बाजार में जीएसटी का भंवरजाल कम होने का नाम नहीं ले रहा। कई व्यापारी जीएसटी का सॉफ्टवेयर और कम्प्यूटर नहीं ले पाने के कारण कम्प्यूटर प्रिन्टेड इनवॉइस ट्रांसपोर्ट पर नहीं भेज पा रहे। ऐसे में कुछ ट्रांसपोर्टर्स हाथ से लिखे इनवॉइस को नहीं मानकर ऑर्डर लेने से मना कर रहे हैं।
जीएसटी के नियमानुसार व्यापारी को ऑर्डर के साथ इनवॉइस और बिल नंबर 402 तथा 403 देना होता है, जिसमें माल बेचने वाले और माल लेने वाला का जीएसटी नंबर और अन्य जानकारी होती है। जीएसटी लागू होने के बाद धीरे-धीरे व्यापरी नए ढंग से व्यापार पद्धित में आ रहे हैं, लेकिन कई व्यापारी अभी भी कम्प्यूटर और जीएसटी का सॉफ्टवेयर नहीं ले सके हैं। साधन के अभाव में वह प्रिन्टेड इनवॉइस नहीं बना पा रहे तथा हाथ से बने बिल में ही जानकारी देकर भेज रहे हैं। ट्रांसपोर्टर्स ऐसे व्यापारियों का ऑर्डर लेने से इनकार कर रहे है।
नियमानुसार हाथ से बने टैक्स इनवॉइस मान्य हंै। इसका कोई फॉर्मेट नहीं है। इनवॉइस में व्यापारी को अपना नाम, पता, जीएसटी नंबर, बिल क्रमांक, बिल की तारीख के अलावा बिल टु में खरीदार का नाम, पता, जीएसटी नंबर, राज्य का नाम तथा राज्य संख्या बतानी होगी। इसके अलावा माल या सेवा के संबंध में माल का नाम, एच.एस.एन कोड, उसका मापदंड, डिस्काउंट तथा सीजीएसटी, आईडीएसटी, एसजीएसटी और विक्रेता के नाम और हस्ताक्षर की मुहर की जगह होनी चाहिए। इनवॉइस में रिवर्स चार्ज मैकनिज्म का कॉलम भी होना चाहिए। इस कॉलम में हां या ना लिखना है।
यदि किसी अन रजिस्टर्ड व्यापारी से माल खरीदते हैं तब खरीदार को अपने नाम से बिल बनाना पड़ेगा। टैक्स इनवॉइस की तीन कॉपियां बनानी होंगी। इनमें एक खरीदार के लिए, एक रिकॉर्ड के लिए और एक ट्रांसपोर्टर के लिए होगी।
व्यापारी चिंतित
&जीएसटी के अमल के बाद व्यापारी धीरे-धीरे कम्प्यूटर, प्रिन्टर और अन्य साधन खरीद रहे हैं। जानकारी के अभाव में कई व्यापारी प्रिन्टेड बिल नहीं बना पा रहे। कुछ ट्रांसपोर्टर प्रिन्टेड बिल ही मांग रहे हैं, नहीं होने पर ऑर्डर नहीं ले रहे।श्रीकृष्ण बंका, व्यापारी
हाथ से बने बिल मान्य
&हाथ से बने बिल भी मान्य हैं, सिर्फ प्रिन्टेड बिल का आग्रह करना गलत है। हाथ से बने बिल में बेचने और खरीदने वाले दोनों के नाम, पता, जीएसटी नंबर, बिल नंबर, राज्य का नाम तथा एच.एस.एन कोड, दिया गया डिस्काउन्ट, सीजीएसटी, आईजीएसटी, एसजीएसटी सहित की जानकारी हस्ताक्षर और मुहर के साथ देनी होगी। इसके अलावा रिवर्स मैकनिज्म का कॉलम भी होना चाहिए तब यह मान्य है। इसके अलावा जीएसटी के बाद पुराने बिल यथावत रख सकते हैं। या तो बिल की संख्या 1 से शुरु कर सकते हैं।रमाकांत गुप्ता, सीए
Published on:
11 Aug 2017 10:32 pm
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