
कनाडाई प्रांत अल्बर्टा के जंगलों की आग का धुआं पहुंचा अमरीका तक
टोरंटो। कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में लगी जंगल की आग का धुआं इसके पूर्वी भाग क्यूबेक और ओंटारियो में अमरीका की सीमा तक पहुंच गया है। अमरीकी एजेंसी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) की ओर से ली गई तस्वीरों में इसकी पुष्टि हुई है। अलबर्टा में गुरुवार को 75 स्थानों पर जंगल की आग लगी हुई थी और इनमें से 23 जगहों पर स्थिति नियंत्रण से बाहर थी। आमतौर पर इस क्षेत्र में मई की शुरुआत में जंगलों की आग सामान्य घटना होती है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर की घटनाएं असामान्य हैं। आने वाले दिनों में जब तापमान में वृद्धि होगी तो उससे जंगल में आग की घटनाएं और भी बढ़ेगी।
हालात पर काबू पाने के लिए सेना का सहारा:
अल्बर्टा में लगी आग को नियंत्रित करने के लिए 300 कनाडाई सैनिकों को स्थानीय फायरफाइटर्स की मदद के लिए तैनात किया गया है। सेना, लोगों को सुरक्षित स्थान पर भी पहुंचाएगी। आग की वजह से प्रांत के 30,000 लोगों को घर छोडऩे के लिए मजबूर होना पड़ा है। 28 स्कूल बंद है, जिससे 6,000 से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं। अल्बर्टा में इस साल अब तक 427 आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे 4,10,000 हेक्टेयर भूमि पर फैले जंगल बर्बाद हो गए। यह आंकड़ा पिछले पांच सालों के औसत से लगभग दोगुना है। पश्चिमी कनाडाई प्रांत अल्बर्टा हाल के वर्षों में बार-बार चरम मौसम की मार झेल रहा है और जलवायु परिवर्तन के कारण इसकी तीव्रता व आवृत्ति बढ़ गई है।
ब्रिटिश कोलंबिया और सस्केचवन प्रांत भी प्रभावित:
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया और सस्केचवन प्रांत में भी आग की घटनाएं हुई हैं। ब्रिटिश कोलंबिया में पिछले कुछ दिनों से तापमान अधिक बना हुआ है, जिससे जंगल की आग और बर्फ के पिघलने से बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। ब्रिटिश कोलंबिया-अल्बर्टा सीमा के नजदीक स्थित फोर्ट सेंट जॉन शहर का तापमान आने वाले दिनों में 30 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इस शहर के पास ही एक जंगल में आग लगी हुई है, जो तापमान में वृद्धि से भयावह हो सकती है। अधिक आग की घटनाओं से जंगल कभी-कभी स्थायी रूप से झाडिय़ों में बदल जाता है, इससे भूमि की वातावरण से कार्बन सोखने की क्षमता घटती है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्र भविष्य में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील होने लगते हैं।
खतरनाक स्तर तक पहुंच जाएगी जंगलों की आग:
वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन और भूमि उपयोग में बदलावों ने जंगलों की आग को बढ़ाया है। पिछले कुछ सालों में उत्तरी अमरीका, ब्राजील, यूरोप के कुछ हिस्सों और ऑस्ट्रेलिया आदि में आग लगने की विनाशकारी घटनाएं हुई हैं। आपदा का असर खेती, मानव व पशुओं के स्वास्थ्य और प्राकृतिक पर्यावरण पर होता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2030 तक इस आपदा में 14 फीसदी की वैश्विक वृद्धि होने की आशंका है, जो 2050 के अंत तक 30 प्रतिशत और 2100 तक 50 फीसदी हो जाएगी। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान होने से कुछ जानवरों और पौधों की प्रजातियां भी विलुप्त होंगी।
पिछले साल दुनियाभर में जंगलों की आग
Published on:
13 May 2023 06:57 pm
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