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महाराजा मानसिंह ने 913 वर्ष पूर्व बसाया था सकट गांव, चौथ माता मंदिर भी बनाया

सकट चौथ माता मंदिर की स्थापना करवाई थी जो आज जन-जन की आस्था का केंद्र है

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Shyam Sunder Sharma

Oct 20, 2022

महाराजा मानसिंह ने 913 वर्ष पूर्व बसाया था सकट गांव, चौथ माता मंदिर भी बनाया

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अलवर. अलवर जिले की अरावली पर्वत मालाओं के बीच बसे सकट गांव की स्थापना आज से करीब 913 वर्ष पूर्व जयपुर महाराजा मानङ्क्षसह ने करवाई थी। उन्होंने ही गांव में सकट चौथ माता के मंदिर की स्थापना करवाई थी जो आज जन-जन की आस्था का केंद्र है। चौथ माता के मंदिर से सकट गांव की पहचान है।

गांव का इतिहास
चौथ माता मंदिर के महंत शरद पाराशर, हितेश पाराशर व मुकेश पाराशर ने बताया कि आज से करीब 913 वर्ष पूर्व सकट गांव काली पहाड़ी की तलहटी में बसा हुआ था, जिसका नाम गादवाड़ा था। उन्होंने बताया कि चौथ माता मंदिर की स्थापना से पूर्व यहां हरा भरा जंगल था। उस जमाने में जंगल में गादवाडा के ग्रामीण अपने पशु चराने आया करते थे। उसमें से एक गाय प्रतिदिन जंगल में एक जाल के पेड़ के नीचे जाकर खड़ी हो जाती थी । जिससे गाय के स्तनों से स्वतही दूध की धार निकलकर जमीन में जाया करती थी। इस दृश्य को एक दिन गाय के मालिक ने देख लिया और इस बात को उसने गांव वालों को जाकर बताई। बताया जाता है कि एक बार जयपुर नरेश को सपने में चौथ माता ने दर्शन दिए तथा इस स्थान पर अपना मंदिर व गांव बसाने की बात कही। इसके बाद जयपुर नरेश ने माता से आदेश पाकर यहां माता का भव्य मंदिर बनवाया और यहीं सकट गांव की नींव रखी। चौथ माता का मंदिर यहां सबसे बड़ा है। हर वर्ष वैशाख माह की चतुर्थी पर माता का तीन दिवसीय वार्षिक मेला लगता है।


गांव में ये मंदिर भी

गांव में चौथ माता के मंदिर के अलावा गणेशजी, सीतारामजी, चतुर्भुज नाथजी हरिदास जी बांके बिहारीजी, लक्ष्मणजी, जगदीशजी, रघुनाथजी, खाकनाथजी, थाईं वाले हनुमानजी का मंदिर है, जहां वर्ष भर अनुष्ठानों का दौर चलता रहता है।


बावड़ी खण्डहर में हो रही तब्दील

गांव में प्राचीन विरासत के नाम पर एक बावड़ी बनी हुई है जो देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील होती जा रही है।