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सत्र की शुरूआत में मिलने वाला बजट, सत्र समाप्ति पर मिला

अब लैप्स होने का मण्डराया खतरा, छुट्टी में शिक्षकों ने पोर्टल पर किया काम

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डूंगरपुर. सरकार के खेल भी निराले हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों को सत्र की शुरूआत में मिलने वाला बजट वित्तीय वर्ष की समाप्ति के ठीक पहले जारी किया है। प्रदेश सरकार ने 28 मार्च को प्रदेश के माध्यमिक व प्रारंभिक के स्कूलों के लिए कुल 205.81 करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट स्वीकृत कर जारी किया है। इससे स्कूलों में बिजली-पानी के बिलों का भुगतान, स्टेशनरी खरीद, इंटरनेट व्यय, शाला स्वच्छता व अन्य विद्यार्थी हित के खर्चों के लिए संस्थाप्रधानों व शिक्षकों द्वारा अपनी जेब से खर्च किए गए पैसों का पुनर्भरण हो सकेगा।

डूंगरपुर के 2737 को मिला बजट
डूंगरपुर जिले के कुल 2737 सरकारी स्कूलों के लिए सरकार ने सात करोड़ 11 लाख 69 हजार 272 रुपए की कम्पोजिट स्कूल ग्रांट की राशि जारी की है। इसमें माध्यमिक शिक्षा के 453 राउमावि को 2 करोड़ 61 लाख 96 हजार 872 रुपए का बजट मिला है। वहीं, प्रारंभिक शिक्षा के 2284 स्कूलों को 4 करोड़ 49 लाख 72 हजार 400 रुपए की कम्पोजिट स्कूल ग्रांट स्वीकृत की है।

राजस्थान पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
राजस्थान पत्रिका ने 19 मार्च को ‘स्कूलों पर चढ़ी उधारी, जेब हो गई है खाली’ शीर्षक से डूंगरपुर के अंक में समाचार प्रकाशित किया था। इसमें शिक्षण सत्र की शुरूआत में बंटने वाली राशि सत्र समाप्ति तक आधी भी नहीं देने से संस्थाप्रधानों को उधारी में काम चलाने को लेकर मामला प्रमुखता से उठाया था। विभाग ने देर ही सही पर आखिरकार नौ दिन बाद बजट जारी किया है।

उपयोग नहीं होने पर लेप्स हो जाएगा बजट
वित्तीय वर्ष 2024-25 समाप्ति के ठीक तीन दिन विभाग ने बजट जारी किया है। विभागीय अधिकारियों के दबाव के चलते संस्थाप्रधानों ने सिंगल नोडल एकाउंट (एसएनए) पोर्टल पर सर्वर डाउन की समस्या से जुझते हुए कुछ राशि व्यय भी की है। पर, इसके बाद अवकाश के चलते पोर्टल पर लोड बढऩे से राशि ट्रांसफर नहीं हो पाई है। ऐसे में सोमवार को भी दिन भर संस्थाप्रधान जुटे रहे। अगर राशि व्यय करने की तिथि में बढ़ोतरी नहीं होती है, तो बजट लैप्स हो जाएगा। शिक्षक संघ राष्ट्रीय के जिला उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि सरकार को सत्र की शुरूआत में ही बजट दे देना चाहिए तथा इस वर्ष 30 अप्रेल तक तिथि बढ़ानी चाहिए।