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नोट के बदले वोट की सोच बदले तो स्वच्छ हो राजनीति

पत्रिका जनप्रहरी अभियान: युवाओं के अलावा बुद्धिजीवियों ने लिया स्वच्छ राजनीति के उद्देश्य को लेकर लोगों को जागरूक करने का संकल्प

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Patrika Jan Prahari Abhiyan: People aware about clean politics

Patrika Jan Prahari Abhiyan: People aware about clean politics

सिंगरौली. राजनीति में अपराधियों की इंट्री के लिए जितनी जिम्मेदार राजनीतिक पार्टियां है। उतना ही जिम्मेदार मतदाता हैं। नोट के बदले वोट और जाति-पाति से प्रभावित हुए बिना मतदाता अपने मत का प्रयोग करे तो राजनीति स्वत स्वच्छ हो जाएगी। ये विचार पत्रिका की ओर से आयोजित जनप्रहरी अभियान के तहत आयोजित एक परिचर्चा में आया। स्वच्छ हो राजनीति विषय पर आयोजित परिचर्चा में इसी प्रकार युवाओं और शहर के बुद्धिजीवियों ने कई अन्य विचार दिए। साथ ही संकल्प लिया कि वे पत्रिका के अभियान से जुडकऱ न केवल स्वच्छ राजनीति के लिए कार्य करेंगे। बल्कि दूसरों को भी प्रेरित करेंगे।

कलेक्ट्रेट भवन में जनअभियान परिषद के कार्यालय में आयोजित परिचर्चा युवाओं और बुद्धिजीवियों ने ऐसा नेता जनप्रतिनिधि के रूप में चुनने का सुझाव दिया, जो देश के संविधान के अनुरूप चले। न कि संविधान को स्वयं के अनुरूप बदलने की कोशिश करे। इसी प्रकार अपराधियों को राजनीति से दूर करने, राजनीति में पूंजीपतियों के हस्तक्षेप को कम किए जाने, युवाओं को रोजगार दिलाने, जाति और धर्म में समाज को बांटकर वोट बनाने के बजाए विकास के मुद्दे पर बात करने जैसे कई बिन्दुओं पर बुद्धिजीवियों के विचार आए।

परिचर्चा में शामिल दो दर्जन से अधिक लोगों ने अंत में जनप्रहरी अभियान के उद्देश्य को पूरा करने का संकल्प लिया। जनअभियान परिषद के समन्वयक राजकुमार विश्वकर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में समाजसेवी सुरेश गिरी ने सभी को संकल्प दिलाया। परिचर्चा में यदुवंश सिंह यादव, शिव प्रसाद साहू, शिवेंद्र धर द्विवेदी, विवेका नंद द्विवेदी, श्रीनिवास श्रीवास्तव, जग प्रसाद विश्वकर्मा, द्वारिका प्रसाद कुशवाहा, शिवचरण कुशवाहा, रामसूरत विश्वकर्मा, अजय सोनवानी, मनोहर लाल वर्मा, रमेश कुमार गुर्जर, सुरेश कुमार सहित अन्य युवा व वरिष्ठ जन शामिल हुए।

जनप्रहरी अभियान से जुडऩे जाहिर की इच्छा
परिचर्चा के दौरान कई सदस्यों ने जनप्रहरी अभियान से जुडऩे की इच्छा जाहिर की। पत्रिका के अभियान की सराहना करते हुए कहा कि जनसरोकार से जुडकऱ पत्रिका ने एक अलग आयाम स्थापित किया है। सुरेश गिरी ने कहा कि अभियान का हिस्सा बनकर पत्रिका के समूह के उद्देश्य की पूर्ति करने में जिले के युवा अपनी सहभागिता दें। ताकि जिले को फिर से एक स्वच्छ छवि का जनप्रतिनिधि मिल सके।

वर्जन -
संवैधानिक संस्थाओं का महत्व बना रहेगा, जबकि राजनीति स्वच्छ होगी। न्यायपालिका, विधायिका व कार्यपालिका तभी सही के कार्य करेंगी, जब समाज व देश को स्वच्छ छवि का जनप्रतिनिधि मिलेगा। ये ध्यान रखना होगा।
- सुरेश गिरी।

जनप्रतिनिधि चुनने में निजी स्वार्थ आड़े नहीं आना चाहिए। देश व समाज के हित को ध्यान में रखकर जनप्रतिनिधि का चुनाव होना चाहिए। सत्ता के लालची लोगों को मतदान नकारें। तभी राजनीति में अपराधियों की इंट्री बंद होगी।
- शिवेंद्रधर द्विवेदी।

दबे-कुचले लोगों को समाज में स्थान दिलाने वालों का चयन किया जाना चाहिए। निजी स्वार्थ पर केंद्रीत राजनीति करने वालों को हतोत्साहित करना होगा। यह केवल मतदाता ही कर सकता है। आगामी चुनाव में इसे ध्यान में रखना होगा।
- यदुवंश सिंह यादव।

जनहित के लिए कार्य करने वालों को राजनीति में स्थान मिलना चाहिए। जनता से वादा पूरा करने वालों को ही जनप्रतिनिधि बन रहने का अधिकार है। मतदाता केवल जाति-धर्म से हटकर विकास के मुद्दे पर बात करने वालो ंको स्वीकार करें।
- शिवप्रताप साहू।