
डॉ. सुशील सिंह चौहान / उदयपुर . शहर से करीब 26 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल मानपुरा गांव के बच्चे इन दिनों चिकन पॉक्स (छोटी चेचक) की जकडऩ में है। घर-घर इसके मरीज हैं। चिकित्सा विभाग ने ऐसे 20 जनों को चिह्नित किया है। इधर, बीमार बच्चों के अभिभावक अंधविश्वास के शिकंजे में इस कदर जकड़े हैं कि वे बच्चों का इलाज भी नहीं करवा रहे। कई बच्चों की स्थिति नाजुक बनी हुई है। दुर्गम पहाडिय़ों पर छितरी बस्ती के ये बच्चे चिकित्सा सुविधा से वंचित है। शनिवार को इस दुर्गम क्षेत्र में पत्रिका टीम पहुंची। चिकित्सकों व नर्सिंग स्टॉफ को साथ ले जाकर अभिभावकों से बच्चों के इलाज को लेकर समझाइश की। इनमें से दो बच्चों को महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय की बाल इकाई एवं हिरण मगरी सेक्टर-4 स्थित सेटेलाइट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
पीएचसी क्षेत्र में 262 चिह्नित
पीएचसी चांसदा के रिकॉर्ड के अनुसार उनके क्षेत्र में 262 नौनिहाल चिन्हित हैं। पीएचसी प्रभारी डॉ.विनोद कुमार खांट की मानें तो उनके क्षेत्र में खसरे व अन्य बीमारियों से बचाव के लिए 64 फीसदी टीकाकरण हो चुका है। गंभीर बच्चों को रैफर किया जा रहा है, लेकिन परिजन उन्हें चिकित्सालय नहीं ले जा रहे हैं।
यूं मिले हालात
बीमार बच्चों की सूचना पर पत्रिका टीम ने दूर-दराज के पहाड़ी हिस्से पर जाकर इस पीड़ा को समझने का प्रयास किया। मानपुरा सब सेंटर की एएनएम तारा रेगर एवं आशा सहयोगिनी ललिता मेघवाल को साथ लिया। मानपुरा से करीब ढाई किलोमीटर भीतर टिकलिया फला निवासी गणेशलाल के घर पहुंची टीम ने पाया कि उसकी बेटी सुनीता (5) और सुरेश (3) बीमारी की चपेट में होकर बुखार में तप रहे हैं। बच्चों के चेहरे पर दानेदार घमोरियों के साथ उसमें पानी भरने और फूटकर सूखने जैसे लक्षण दिखे। बच्चों के पिता गणेश ने बताया कि गांव में इस बीमारी के लिए चिकित्सक के पास नहीं जाते हैं। मानपुरा निवासी खुशबू (3) पुत्री नंदलाल को भी यही बीमारी मिली। आगे जाने पर पता चला कि दीपक नाम के बच्चे को भी यह बीमारी थी, गंभीर होने के बाद परिजन शुक्रवार सुबह उसे सेटेलाइट हॉस्पिटल लेकर आए। दूरदराज के नालाफला में इस बीमारी से एक बच्ची के गंभीर होने की सूचना है। इसी तरह मानपुरा निवासी कंकू (7) पुत्री उदयलाल का बाल चिकित्सालय में उपचार जारी है।
दिए हैं निर्देश
फिलहाल इसे चिकन पॉक्स नहीं कह सकते। भर्ती बच्चों के बारे में जानकारी नहीं मिली है। वहां टीम भेजकर पुख्ता चिकित्सा व्यवस्था करवाई जाएगी।
डॉ. दिनेश खराड़ी, कार्यवाहक बीसीएमओ, गिर्वा खण्ड
किया है पाबंद
बढ़ रही वायरल बीमारी को लेकर निचले स्तर पर आरसीएचओ एवं गिर्वा बीसीएमओ को गंभीरता से लेने के लिए पाबंद किया है।
डॉ. संजीव टाक,सीएमएचओ, उदयपुर
Published on:
25 Feb 2018 02:47 pm
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