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विधानसभा चुनाव: जब विधायक ने युद्ध के लिए 1.1 लाख रुपए व बेटा किया देश के नाम

दागियों को लेकर चर्चा में रहने वाली राजनीति में देशभक्ति व दानवीरता के किस्से भी कम नहीं है। ऐसा ही एक किस्सा दांतारामगढ़ से तीन बार विधायक रहे ठाकुर मदन सिंह से जुड़ा है।

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सीकर

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kamlesh sharma

Oct 17, 2023

Rajasthan Assembly Election: Dantaramgarh Thakur Madan Singh

सचिन माथुर/सीकर। दागियों को लेकर चर्चा में रहने वाली राजनीति में देशभक्ति व दानवीरता के किस्से भी कम नहीं है। ऐसा ही एक किस्सा दांतारामगढ़ से तीन बार विधायक रहे ठाकुर मदन सिंह से जुड़ा है। वे सियासत को समाजसेवा का जरिया मान सिद्धांतों की राजनीति पर अटल रहे। यही वजह थी कि खुद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी ने उन्हें जनसंघ के प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए चुना था।

9 अप्रैल 1919 में दांता गढ़ में जन्मे मदन सिंह अजमेर की मेयो कॉलेज से पढे व जयपुर रियासत में द्वितीय लेफ्टिनेंट रहे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तीन वर्ष तक यूरोप में रहकर भारतीय सेना की तरफ से जंग लड़ी। 1957 में भैरोंसिंह शेखावत के सीट खाली करने पर राम राज्य परिषद के प्रत्याशी के रूप में उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव जीता था। पहली चुनावी पारी के अंतिम वर्ष में ही भारत व चीन के बीच युद्ध शुरू हो गया।

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इसी बीच तत्कालीन रक्षा मंत्री सीके कृष्ण मेनन अक्टूबर 1962 में जयपुर आए। यहां रामनिवास बाग मैदान में सभा में ठाकुर मदन सिंह भी मंच पर पहुंच गए। यहां युद्ध में सहयोग के लिए 16 वर्षीय बेटे ओमेंद्र सिंह को मातृभूमि की रक्षा के लिए अर्पित करने की घोषणा के साथ उन्होंने 1.1 लाख रुपए और सोने की मूठ वाली एक तलवार मेनन को भेंट की।

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उनकी देशभक्ति व दानवीरता को देख पूरा मैदान तालियों की गडगड़ाहट से गूंज उठा। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी उनकी देशभक्ति की खूब सराहना हुई। ठाकुर मदन सिंह ने 1967 का चुनाव जनसंघ से 1977 का चुनाव निर्दलीय जीता था। 23 दिसंबर 2001 82 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।