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इस लेडी कांस्टेबल ने सुसाइड नोट में लिखा औरत की जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द, यह अंतिम इच्छा भी जताई

राजस्थान पुलिस कांस्टेबल सीमा ने सुसाइट नोट में लिखा कि...मुझे माफी कर देना। मैं अपने पति के बिना जी नहीं सकती

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Lady constable Seema Chaudhary suicide Note of Bikaner Police

constable Seema

सीकर.

जिंदगी इम्तिहान लेती है, जिसमें कभी हम पास तो कभी फेल हो जाते हैं। फेल होने पर कई लोग इस कदर टूट जाते हैं कि उन्हें जीने की कोई तमन्ना ही नहीं रह जाती है। ऐसा ही राजस्थान के झुंझुनूं जिले के छोटे से गांव भिर्र की युवती सीमा के साथ हुआ। पढ़ाई के बाद सीमा के सामने नौकरी लगने की चुनौती आई तो उसने सहज स्वीकार किया और राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा को उतीर्ण करके दिखाया।

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सीमा के पति चिड़ावा निवासी हरकेश मान भी पुलिस में थे। दोनों की जिंदगी खुशी-खुशी से बीत रही थी। चार साल पहले बेटी वंशिका पैदा हुई। इसके बाद तो मानों घर का कोना-कोना खुशियों से सराबोर हो उठा था। सीमा व हरकेश ने पाली जिले में अपना तबादला करवा लिया था।


अब तक हर मुश्किल का बहादुरी से सामना करती आ रही सीमा का जिंदगी ने तीन-चार माह पहले एक और इम्तिहान लिया। इस बार चिड़ावा में हुए सड़क हादसे में सीमा के पति हरकेश की मौत हो गई। पति से जुदाई सीमा से सही नहीं गई। वह अवसाद में रहने लगी।

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पाली में मन नहीं लगा तो महीनेभर पहले बीकानेर तबादला करवाया लिया। बेटी वंशिका को लेकर बीकानेर आ गई और करणीनगर स्थित पुलिस कॉलोनी में सरकारी आवास में रहने लगी, मगर यहां भी अवसाद ने सीमा का पीछा नहीं छोड़ा। इसी वजह से सीमा के साथ उसका भाई व सुमित व देवर भी रहने लगा था। रविवार को उसका भाई व देवर उसकी स्कूटी ठीक कराने और खरीदारी करने बाजार चल गए। शाम को वापस आए तो सीमा व वंशिका कमरे में फांसी के फंदे पर लटकी मिली।

सीमा ने सुसाइट नोट में लिखा कि...
मुझे माफी कर देना। मैं जीना नहीं चाहती और मेरी बेटी किसी दूसरे के भरोसे भी नहीं छोडऩा चाहती। मैं इसे भी अपने साथ ले जा रही हूं। मैं अपने पति के बिना जी नहीं सकती। मेरे पति मुझे यूं अचानक छोड़कर चले गए। ये सदमा मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूं। माता-पिता व सास-ससुर से माफी मांगती हूं।

सुसाइड नोट में जताई नेत्रदान की इच्छा
सीमा चौधरी ने सुसाइड नोट में नेत्रदान की इच्छा जताई। उसकी अंतिम इच्छा पर श्रीरतन नेत्र ज्योति संस्थान के चिकित्सकों ने देर रात को मां-बेटी के नेत्र संग्रहित किए। इस मां-बेटी की आंखों से चार लोग दुनिया देख सकेंगे।