
katli nadi sikar
सीकर. शेखावाटी की लाइफ लाइन...। शेखावाटी की सबसे पवित्र नदी...। शेखावाटी की सबसे पुरानी नदी। और भी ना जाने कितने नाम। गांव-गांव में इसकी अलग पहचान। हर मोड़ पर इसका अलग ही अंदाज। कहीं यह किसी गांव के बीचोंबीच से गुजरती है तो कहीं दो गांवों की सीमा निर्धारित करती हुई आगे बढ़ती है, मगर इस नदी की सबसे खास बात जो है, वो इसके नाम से ही बयां हो रही है। नाम है कातली नदी।
काटली नदी का उद्गम स्थल राजस्थान के सीकर जिले के गणेश्वर की पहाडिय़ां हैं। इस नदी का पानी मिट्टी का विशेष तरह से कटाव करते हुए आगे बढ़ता है। इसलिए इसे काटली नदी कहा जाता है। काटली नदी का बहाव क्षेत्र सीकर जिले के खंडेला व झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी, झुंझुनूं व चिड़ावा उपखण्ड के दर्जनों से होकर चूरू जिले की सीमा पर स्थित झुंझुनूं जिले के गांव मंड्रेला तक है।
काटली नदी को पूरे वैग के साथ बहे और मंड्रेला तक में प्रवेश किए वर्षों हो गए। बारिश कम होना, नदी के जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रम और बजरी खनन के लिए गहरे खड्डे होना है। इस वजह से काटली नदी सीकर जिले में ही सिमटकर रह जाती है।
काटली में वर्षों बाद आया पानी
वर्ष 2018 में अब तक सीकर जिले में बारिश अच्छी रही है। इन दिनों गणेश्वर और खंडेला में काटली नदी में पानी की आवक हुई है। बुधवार को काटली नदी में पानी आने के कारण खंडेला क्षेत्र में जयपुर-झुंझुनूं मार्ग जाम रहा। दो घंटे तक वाहनों का आवागमन नहीं हो सका।
काटली नदी के दोनों ओर वाहनों की नदी लंबी कतार लग गई। काटली नदी सीकर जिले के खंडेला तहसील के ग्राम कोटड़ी लुहारवास से होकर गुजरती है। ऐसे इस नदी को कोट वाली नदी के नाम से भी जाना जाता है। कोटड़ी लुहारवास के लोगों की मानें तो काटली नदी में वर्षों बाद इतना पानी आया है। यह अच्छा संकेत है। करीब दो घंटे बाद पानी की आवक धीमी हुई तब वाहनों की आवाजाही शुरू हो सकी।
बढ़ सकता है भूजल स्तर
खंडेला इलाके में पेयजल संकट साल-दर-साल गहराता जा रहा है। लोगों का कहना है काटली नदी में पानी की आवक इसी तरह जारी रही तो क्षेत्र में भूजल स्तर भी काफी बढ़ जाएगा, जिससे पेयजल किल्लत की समस्या दूर हो जाएगी।
Updated on:
25 Jul 2018 03:21 pm
Published on:
25 Jul 2018 03:09 pm
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