
भाजपा-कांग्रेस में नाम की लड़ाई से जनता को लगा 6 करोड़ का झटका, जानें क्या है मामला
अजय शर्मा, सीकर.
Atal seva kendra Name Changed Rajiv Seva Kendra : नाम की लड़ाई सच में बहुत बड़ी नुकसानदायक होती है। राजस्थान की जनता इस सच को बड़े अच्छे से जानती है। पिछले दस साल से चल रही भाजपा ( BJP ) और कांग्रेस ( Congress ) में नाम की लड़ाई ने इस बार फिर जनता की खूब जेब ढ़ीली की है। पहले अटल सेवा केन्द्र ( Atal Seva Kendra ) अब फिर से राजीव सेवा केन्द्र ( Rajiv Seva Kendra ) बनने से राज्य सरकार ( Rajasthan Government ) को 5.60 करोड़ की चपत लग गई है। प्रदेश की 9894 पंचायत और 295 पंचायत समितियों के नाम बदल दिए थे। इसके लिए औसत रुप से प्रति ग्राम पंचायत दो हजार और प्रति पंचायत समिति पांच हजार रुपए का खर्चा हुआ है। पिछली गहलोत सरकार ( Rajasthan CM Ashok Gehlot ) के समय राजीव गांधी सेवा केन्द्र नाम लिखवाने में लगभग डेढ़ करोड़ का खर्चा हुआ था। भाजपा सरकार ने जब इनका नाम अटल सेवा केन्द्र किया तो खर्चा लगभग 1.85 करोड़ हुआ। अब फिर 2019 में नाम बदलने से लगभग दो करोड़ का खर्चा हुआ है। खास बात यह है कि सरकार ने नाम बदलने की तो घोषणा कर दी, लेकिन इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं दिया। इस कारण ज्यादार ग्राम पंचायत व पंचायत समितियों ने विकास के मद में से यह खर्चा किया है।
इनका भी बदला जा चुका है नाम
प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से दी जाने वाली छात्रवृत्ति का नाम भी बदल दिया गया है। योजना के आगे से पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटा दिया गया। दस्तावेज से भी पंडित दीनदयाल का नाम हटाने के साथ बेरोजगारी भत्ता योजना का नाम भी बदला गया है। पहले सरकारी दस्तावेजों पर पंडित दीनदयाल का नाम होने के कारण लाखों रुपए के कागज रद्दी हो चुके है।
इस राशि से बदल सकती है सूरत
नाम की चाह में हर साल होती सरकार धन की बर्बादी हो रही है। एक्सपर्ट का कहना है कि यदि सरकारें इस राशि को गांवों के विकास पर खर्च करती तो लगभग 50 गांवों में आधारभूत सुविधाएं बढ़ाई जा सकती थी। वहीं इस राशि 100 से ज्यादा गांवों में नए सरकारी व स्कूल भी खोले जा सकते हैं।
बेटियों की साइकिलों ने बचाए 8.5 करोड़
सरकारी स्कूलों में नौवीं कक्षा की छात्राओं को निशुल्क दी जाने वाली साइकिलों का रंग कांग्रेस सरकार ने फिर काला कर दिया है। इससे विभाग के सालाना करीब 8.50 करोड़ रुपए बचेंगे। वर्ष 2012-13 में कांग्रेस सरकार ने बालिकाओं का नामांकन बढ़ाने के लिए 9वीं की छात्राओं को निशुल्क साइकिल देना शुरू किया था। तब साइकिल का रंग निर्धारित नहीं किया गया था। काली साइकिल ही छात्राओं को दी गई थी। इसके बाद 2017 में भाजपा सरकार ने साइकिलों का रंग केसरिया कर दिया था। रंग बदलने व आगे टोकरी लगवाने से हर साइकिल की लागत 200-300 रुपए बढ़ गई थी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नवीं में पांच किलोमीटर दायरे से आने वाली सभी बालिकाओं को शिक्षा विभाग साइकिल देता है। जिनका घर इससे ज्यादा दूर होता है, उन्हें ट्रांसपोर्ट वाउचर दिया जाता है।
सात साल में तीन बार बदले नाम
पिछली कांग्रेस सरकार के समय आमजन को एक ही छत के नीचे सरकारी कामकाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सेवा केन्द्रों का निर्माण कराया था। उस समय गहलोत सरकार ने इनका नाम भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र रखा। प्रदेश में 2013 में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा ने इन केन्द्रों का नाम बदलकर अटल सेवा केन्द्र कर दिया। अब फिर सत्ता परिवर्तन के बाद इन केन्द्रों का नाम बदलकर राजीव गांधी सेवा केन्द्र कर दिया है। भाजपा के समय कई सामाजिक संगठनों ने नाम बदलने के फैसले को न्यायालय में चुनौती दी थी लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
भाजपा ने पांच साल कलर बदलने का काम किया
भाजपा ने पांच साल तक शिक्षा को प्रयोशाला बनाकर रख दिया। शिक्षा विभाग में साइकिलों का कलर बदलकर लगभग 8.50 करोड़ रुपए का ज्यादा खर्च कर दिए। भाजपा अब साइकिल का कलर बदलने के पीछे कई बेतुके बयान दे रही है। -गोविन्द सिंह डोटासरा, शिक्षा राज्य मंत्री ( Govind Singh Dotasra )
Published on:
01 Jul 2019 11:00 am
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