
MP Assembly Election 2018: sidhi Assembly BJP Congress Candidates
सीधी। मध्यप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेता भी मैदान में उतर चुके हैं। इस बीच दावेदारों के नाम खुलकर आ रहे हैं। दावेदार जाति-धर्म और क्षेत्रीय पकड़ के आधार पर अपनी-अपनी दावेदारी को मजबूत बता रहे हैं। पाटियों के सामने चुनौती है कि एक नाम तयकर अन्य दावेदारों को कैसे संतुष्ट किया जाए। सीधी सीट पर फिलहाल भाजपा का कब्जा और केदारनाथ शुक्ला लगातार दो बार से विधायक है। इस बार सीधी में भाजपा को अपना-गढ़ बचाने की चुनौती है। क्योंकि कांग्रेस अगर मिलकर चुनाव लड़ती है तो भाजपा को मात भी दे सकती है।
सीधी: कांग्रेस में ज्यादा दावेदार
सीधी विधानसभा सीट जिला मुख्यालय की सीट होने के कारण इस सीट को हथियाने के लिए कांग्रेस जोर आजमाइश में हैं, लेकिन दावेदारों की ज्यादा संख्या आपसी गुटबाजी को जन्म दे रही है। इससे कांग्रेस भितरघात की शिकार हो सकती है, इसके अलावा इस बार आम आदमी पाटी ने भी यहां से प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।
विधानसभा चुनाव में 2013 के वोट
- भाजपा केदारनाथ शुक्ला 53,115
- कांग्रेस कमलेश्वर द्विवेदी 50,755
ये हैं चार मुद्दे
- बेरोजगारी, विकास को लेकर वादाखिलाफी, जातिगत राजनीति का आरोप
मजबूत दावेदार भाजपा
- केदारनाथ शुक्ला - विधायक
- देवेंद्र सिंह चौहान - नपाध्यक्ष
- डॉ. राजेश मिश्रा- जिलाध्यक्ष
- लालचंद्र गुप्ता - पूर्व जिलाध्यक्ष
- इंद्रशरण सिंह - किसान मोर्चा
- संतोष सिंह - वरिष्ठ भाजपा नेता
मजबूत दावेदार कांग्रेस
- इंद्रजीत कुमार - पूर्व मंत्री
- कमलेश्वर द्विवेदी- पूर्व मंत्री
- चिंतामणि तिवारी- पूर्व जिपं अध्यक्ष
- ज्ञान सिंह चौहान- महासचिव
- आनंद मंगल सिंह- कांग्रेस नेता
- आकाश सिंह रिंकू- कांग्रेस नेता
ये भी ठोक रहे ताल
- केके सिंह भंवर, पूर्व विधायक व वरिष्ठ सपा नेता
जातिगत समीकरण
- क्षेत्र में गोंड मतदाता सर्वाधिक हैं। ब्राह्मण, क्षत्रिय और साहू वोटर्स भी बहुतायत में है। शहरी इलाके में व्यापारी वर्ग ही हार-जीत तय करता है।
चुनौतियां
- दो बार से लगातार विधायक से एंटी इंकम्बेसी।
- टिकट न मिलने से भितरघात की आशंका। कुछ निर्दलीय भी लड़ सकते हैं।
विधायक की परफॉर्मेंस
- विकास कार्य पर्याप्त किए। बेरोजगारी व जर्जर सड़कबड़ा मुद्दा। हालांकि, क्षेत्र में उपस्थिति उनके लिए प्लस प्वाइंट हो सकती है। स्लम एरिया में विकास कार्यों की मांग बरकरार है।
स्वास्थ्य व शिक्षा को क्षेत्र में आपेक्षित विकास नहीं हो पाया। जनप्रतिनिधि को खुद प्रयास करने चाहिए।
- चंद्रमोहन गुप्ता, स्थानीय रहवासी
Published on:
08 Sept 2018 02:20 pm
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