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रफी साहब के गीतों को गाकर इस कलाकार को मिल रही है शोहरत

मोहम्मद रफी की पुण्य तिथि पर विशेष-हर आर्केस्ट्रा में होती है रफी साहब के गानों की फर्माइश

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The actor is getting Rafi Saheb's songs by singing fame

The actor is getting Rafi Saheb's songs by singing fame

शहडोल. फिल्म जगत के जाने-माने पाŸव गायक मोहम्मद रफी साहब आज भी आर्केस्ट्रा ग्रुप के कलाकारों की शान बने हुए है। जब भी कहीं गायकी की बात होती है तो वहां रफी साहब का जिक्र अवश्य होता है और आर्र्केस्ट्रा उनके गाए गीतों को गाने की फर्माइश जरूर होती है। यही कारण है कि आर्केस्टा में अधिकांश कलाकार रफी साहब के गाए गीतों को गाकर अपनी पहचान बना रहे हैं। इसी कड़ी में आदिवासी अंचल एक कलाकार 12 वर्ष की उम्र से आर्केस्ट्रा में रफी साहब के गाने गाकर शोहरत बटोर रहा है। वह कलाकार 32 वर्षीय अभिदीप सोनी है, जिसने रफी साहब के गीतों को गाकर अंचल में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है और कई पुरस्कार भी जीते हैं। अभिदीप सोनी को मध्यप्रदेश संंगीत अकादमी भोपाल में भी करीब 600 कलाकारों की भीड़ में गाने का अवसर मिला था, जहां उन्होने रफी साहब का गाया गीत तुम मुझे यूं भूला न पाओगे को गाकर लोगो का दिल जीत लिया था। उन्हे पुरस्कार व प्रशस्त्रि पत्र भी दिया गया। इसके अलावा वर्ष 2011 में संभागीय मुख्यालय के राजेन्द्र क्लब में तात्कालीन कलेक्टर नीरज दुबे और पुलिस अधीक्षक सुधीर लाड के नेतृत्व में वृहद स्तर पर मोहम्मद रफी नाईट कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें अभिदीप सोनी ने अपनी विशिष्ट भूमिका निर्वहन किया। अभिदीप ने अपने बीस वर्षों के गायकी के सफर में करीब सात सौ मंचीय कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुतियां दी है। जिसमें उन्होने ज्यादातर रफी साहब के गानों को गाया है।
इन गीतों की होती है ज्यादा फर्माइश
रफी साहब ने रोमांटिक, क्लासिकल, सेंटीमेंटल, फोक, कामेडी, वेस्टर्न, मोटिवेशनल, पेट्रिओरिक और डिवोसनल गजल व गीत गाए हैं, मगर उनके 26 हजार गानों में फिल्म महुआ में रफी साहब द्वारा गाया गया गीत... दोनों ने किया था प्यार मगर... पिछले कई दशकों से आज भी आदिवासी अंचल के आर्केस्ट्रा ग्रुप का भजन बना हुआ है। आर्केस्ट्रा में इस गीत की सबसे ज्यादा फर्माइश होती है। इसके अलावा क्या हुआ तेरा वादा...चुरा लिया है तुमने जो दिल को...आजा तुझको पुकारे मेरे गीत रे...पत्थर के सनम...बदन पे सितारे लपेटे हुए...चाहे कोई मुझे जंगली कहे...फूल तुम्हे भेजा है खत में...लिखे जो खत तुझे...परदेसियों से न अखिंया...बने चाहे दुश्मन जमाना..ये रेशमी जुल्फें...मैं कहीं कवि न बन जांऊ...रहा गर्दिशों में हरदम...आज मौसम बेइमान है...सहित अन्य कई गीत लोगों की जुबां पर होते हैं और लोग इन गीतों की फर्माइश करते हैं।
मेरे प्रेरणास्त्रोत हैं मोहम्मद रफी
32 वर्षीय आर्केस्ट्रा कलाकार अभिदीप सोनी ने बताया कि वह बचपन से ही रफी साहब के गीतों को गा रहे हंै और यही वजह है कि गायकी के क्षेत्र में उनकी विशिष्ट पहचान बन गई है। रफी साहब उनके प्रेरणास्त्रोत रहे हैं। रफी साहब के गीतों की वजह से उनका चयन टीवी शो इंडियल आइडल के प्रथम चरण में हुआ था। जिससे गायकी में उनकी हिम्मत बंधी और आदिवासी अंचल के अलावा सोनी टीवी व जबलपुर के रीजनल शो में उन्होने अपनी प्रस्तुतियां दी हैं।