
पेड़ के नीचे खेर माता का हुआ प्रादूर्भाव, हर मन्नत होती है पूरी
शहडोल। शहर के पांडवनगर स्थित खेर माता के दर्शन करने और अपनी मन्नत मांगने दूर-दूर से लोग आते हैं। करचुरी काल में यहां पर एक बरगद के पेड़ के नीचे खेर माता का अपने आप प्रादूर्भाव हुआ। इसके बाद ग्रामीण लोग उनकी पूजन-अर्चन करने लगे। लंबे समय तक लोग पेड़ के नीचे खेर माता का पूजन करते रहे। इसके बाद लगभग 20 वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने चंदा एकत्रित कर मंदिर बनवाना शुरू किया और कुछ माह में मंदिर बनकर तैयार हो गया। मंदिर में खेर माता सौम्य रूप में है।
हर मन्नत यहां होती है पूरी
मंदिर के पुजारी राजु बैगा ने बताया कि यहां पर दूर-दूर से लोग मन्नत मांगने के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पर जो लोग भी श्रद्धा के साथ माता से मन्नत मांगते हैं। वह जरूर पूरी होती है। खेर माता के बगल में हनुमान जी और भगवान भोले शंकर भी प्रतिमा भी स्थापित है। यहां पर कन्या पूजन, हवन, बच्चों का मूंडन किया जाता है। दूर-दूर के क्षेत्रों से लोग आकर अपने बच्चों का मूंडन करते हैं। नवरात्रि में यहां जवारे भी बोये जाते हैं। यहां पर 201 जवारे बोये गए हैं।
पेड़ के नीचे आते हैं सर्प
यहां आज भी बरगद के पेड़ के नीचे एक प्रतिमा है। उस प्रतिमा के आस-पास सर्प आते रहते हैं। कई श्रद्धालुओं को पेड़ के नीचे सर्प दिखे भी हैं। इसको लेकर ग्रामीणों का कहना है कि वह नागदेवता है। जो माता के यहां आते हैं। श्रद्धालु मंदिर में पूजा करने के बाद बरगद के पेड़ के नीचे स्थित माता की प्रतिमा की भी पूजा करते हैं।
Published on:
19 Oct 2020 12:24 pm
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