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सिवनी के जंगल-पहाड़ों से गिद्धों ने बनाई दूरी

- पन्ना-रायसेन जिले के मुकाबले इस जिले में कम हैं गिद्ध

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जिले में पाए गए गिद्ध।

जिले में पाए गए गिद्ध।

सिवनी. जिले में समतल वन क्षेत्र की अधिकता है, जबकि गिद्ध पहाड़ी इलाकों में अधिक पाए जाते हैं। इसलिए पन्ना या रायसेन जिले के वनों में गिद्ध काफी अधिक संख्या में हैं, जबकि सिवनी जिले में गिद्धों की संख्या काफी कम है। इस वर्ष के पेंच टाइगर रिजर्व इलाकी की गिद्ध गणना को ही देखें तो महज 30-32 गिद्ध पाए गए हैं, जबकि दूसरे जिले में ये आकड़ा पांच-छह सैकड़ा से अधिक है।


जानकारी के मुताबिक इस वर्ष वन वृत्त सिवनी, पेंच टाइगर रिजर्व क्षेत्र में तीन दिवसीय गिद्धों की गणना में 237 वयस्क व अव्यस्क गिद्ध विभिन्न वन क्षेत्रों में दर्ज किए गए हैं। पर्यावरण के सफाईकर्मी कहलाने वाले गिद्ध जिले के उत्तर सामान्य वनमंडल के धूमा परिक्षेत्र अंतर्गत हड्डी गोदाम क्षेत्र में सबसे अधिक संख्या में पाए गए हैं। इसके अलावा घंसौर, लखनादौन, छपारा परिक्षेत्र तथा पेंच के कर्माझिरी में गिद्धों की कहीं-कहीं मौजूदगी पाई गई है। खास बात यह है कि दक्षिण सामान्य वनमंडल में कहीं भी गिद्धों की मौजूदगी नहीं है। जबकि धूमा हड्डी गोदाम जो कि वन विकास निगम बरघाट प्रोजेक्ट के लखनादौन परिक्षेत्र में आता है। इसके अलावा अन्य किसी क्षेत्र में गिद्धों की मौजूदगी नहीं मिली है। सिवनी वन वृत्त में शामिल नरसिंहपुर वनमंडल के करेली और गाडरवाड़ा परिक्षेत्र में कुल सात वयस्क गिद्ध पाए गए हैं। चट्टानी क्षेत्र में तीन घौंसले भी गणना में दर्ज किए गए हैं।बीते साल 2024 को 16 से 18 फरवरी के बीच तीन दिन चली गिद्ध गणना में 234 गिद्ध दर्ज किए गए थे। जिले में गिद्धों की दो प्रजातियां पाई गई है, जिसमें इजिप्शियन गिद्ध तथा सफेद पीठ वाले गिद्धों की प्रजाति प्रमुख है। इस साल 17 फरवरी से प्रारंभ हुई गणना में प्रथम दिन धूमा क्षेत्र में आठ देशी गिद्ध भी दर्ज किए गए थे। लेकिन अगले दो दिनों की गणना में उनकी उपस्थिति नहीं पाई गई। 29 अप्रैल को ग्रीष्म ऋतु में पुन: एक बार गिद्धों की एक दिवसीय गणना का कार्य जिले के सभी वन परिक्षेत्रों में एक साथ यह पता लगाने किया जाएगा कि शीत ऋ तु में जितने गिद्ध गणना में पाए गए थे उनकी उपस्थिति संबंधित क्षेत्रों में बनी हुई है या प्रवासी गिद्ध वापस अपने स्थायी ठिकानों पर लौट गए हैं।


बीते साल 2024 में हुई गणना के दौरान भी 234 गिद्ध पाए गए थे। हालाकि उस दौरान इजिप्शियन गिद्धों की संख्या अधिक थी। जबकि सफेद पीठ वाले गिद्ध कम संख्या में मिले थे। तीन दिनों तक गणना में दर्ज गिद्धों की संख्या की विस्तृत जानकारी भोपाल मुख्यालय को भेज दी गई है, जहां से विश्लेषण के बाद गणना का अंतिम आंकड़ा जारी किया जाएगा। गिद्धों की मौजूदगी जंगल और वन्यजीवन के लिए अच्छा संकेत माना जाता है, क्योंकि पर्यावरण के सफाईकर्मी गिद्ध जंगल में किसी भी मृत वन्यजीव का मांस खाकर पारिस्थितिकीय तंत्र को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। गौरलब है कि 7 फरवरी 2021 में हुई गणना में 192 गिद्ध गए थे। मैदानी अमले को 12 आवास स्थल (घोंसले) भी पेड़ों व अन्य स्थानों पर मिले थे। इससे पहले 12 जनवरी 2019 को 109 गिद्ध गणना में दर्ज हुए थे। उस समय आवास स्थल (घोंसले) की संख्या मात्र 9 थी। 14 मई 2016 को हुई पहली गिद्धों की गणना में जिले में मात्र 63 गिद्ध व 3 आवास पाए गए थे।जिले में बढ़ रही गिद्धों की संख्या गिद्धों की संख्या में बढ़ोत्तरी पर्यावरण संतुलन में उपयोगी साबित होगी। चार वर्ष से कम उम्र के गिद्ध अवयस्क और इससे अधिक आयु के गिद्ध को वयस्क माना जाता है। मध्यप्रदेश में चिंहित 13 प्रमुख स्थानों पर सबसे अधिक संख्या में गिद्ध गणना के दौरान पाए गए हैं। इसमें सिवनी के धूमा बंजारी का हड्डी गोदाम क्षेत्र भी शामिल हैं। पेंच टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक नरेश पाटिदार ने बताया कि तीन दिनों की गणना की विस्तृत जानकारी भोपाल मुख्यालय भेज दी गई है। 29 अप्रैल को पुन: एक बार सभी क्षेत्रों में गणना का कार्य किया जाएगा। बीते सालों की तुलना में गिद्धों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज हो रही है।

इनका कहना है-
पन्ना, रायसेन जिले की अपेक्षा सिवनी में गिद्धों की संख्या काफी कम है। गिद्ध पहाड़ी इलाकों में अधिक रहना पसंद करते हंै। फिर भी जो गणना हुई है, उसके आंकड़े भोपाल भेज दिए गए हैं।रजनीश सिंह, डिप्टी डायरेक्टर पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी

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