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ग्राम पंचायत से कराई जाए मेला के ठेके की नीलामी

ग्रामीणों ने की मांग, रामकुंडी मेला का मामला

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सिवनी. आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड के सुदूर अंचल में बसे रामकुंडी धार्मिक स्थल पर हर साल बसंत पंचमी के अवसर पर आठ दिनों का मेला आयोजित किया जाता है। इस मेले में जरूरी व्यवस्थाओं के लिए ठेका नीलामी जनपद पंचायत घंसौर द्वारा कराई जाती है लेकिन व्यवस्थाएं नहीं की जाती है। ग्रामवासियों ने मेला का ठेका ग्राम पंचायत से कराए जाने की मांग की कलेक्टर से की है।
रामकुंडी धार्मिक स्थल से लगी पांच पंचायतों के सरपंचों का कहना है कि जनपद के ठेकेदार द्वारा मेला समाप्ति पर न तो साफ-सफाई कराई जाती है और न ही इस पर खर्च होने वाली राशि संबंधित ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई जाती है। ठेका नीलामी से होने वाली आय का एक रुपए भी पंचायतों तक जनपद द्वारा नहीं पहुंचाया जाता है। मेला समाप्त होने के बाद ठेकेदार बिना साफ-सफाई कर धार्मिक स्थल को अव्यवस्थित छोड़कर चले जाते हैं। अधिक संख्या में क्षेत्र में पॉलीथिन, जूठे पदार्थ, पत्तल, दोना, कागज आदि उड़कर नजदीक बने पेयजल में जा गिरती है जिससे प्रदूषण का खतरा बना रहता है और बीमारियां उत्पन्न होती है। इस कारण क्षेत्रीय पंचायतों को मेला स्थल की साफ-सफाई करानी पड़ती है। इसके लिए पंचायतों को कोई फंड उपलब्ध नहीं कराया जाता है।
मुख्यमंत्री ने की थी सराहना
ग्रामवासियों ने बताया कि नमामी देवी नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का काफिला उक्त धार्मिक स्थल पर अल्प प्रवास पर रुका था। यहां अपनी व्यवस्थाओं की मुक्त कंठ से प्रशंसा की थी। सरपंचों का कहना है कि धार्मिक स्थल पर जरूरी व्यवस्थाएं यथावत बनी रही इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। जनपद पंचायत घंसौर के अधीन आने वाली पंचायत गोरखपुर की सरपंच कृष्ण भलावी, बरेला सरपंच गयावती बाई, दुर्जनपुर सरपंच रामकली मसराम, अतरिया सरपंच कृष्णबाई, गोरखपुर उपसरपंच हीरालाल, बरेला उपसरपंच रघुपथ सिंह पटेल, रामजी नेमा, सुरेश कुशवाह, किशन सोनी आदि ने मांग की है कि रामकुंडी धार्मिक स्थल में मेला नीलामी का ठेका ग्राम पंचायत गोरखपुर को अधिकृत करने की मांग की है।