
तना छेदक का कहर,कीटनाशक दवा बेअसर
रायसेन. बारिश का सिलसिला थमते ही अब खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान में कीटों का प्रकोप तेजी से बढऩे लगा है। इससे पहले करीबन इक्कीस दिनों तक सावन महीने में बारिश की खींच ने धान व सोयबीन फसलों की रंगत बिगाड़ दी थी।पहले बारिश की लेटलतीफी बाद में आसमान पर छाए हल्के भूरे रंग के बादलों की बदौलत खरीफ सीजन की फसलों पर रोग व कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है।
धान की फसल में रोग लग रहा है। प्रारंभिक धान की खेती के दौरान ही लगभग 25 फीसदी उत्पादन प्रभावित हुआ था। दरअसल धान में लग रहे रोग व कीटों पर नियंत्रण पाने के लिए कोई कारगर उपाय समझ नहीं आ रहा है। कीटों का प्रकोप धान फसल पर तेजी से बढ़ रहा है। इस कारण धान की उत्पादकता पर निश्चित रूप से असर पड़ सकता है। कमोवेश यही हालात खेतों में खड़ी सोयाबीन सहित तुअर,उड़द की फसलों के बने हुए हैं।
कीटों का हमला,धान की फसल बर्बाद
मासेर के किसान परसराम दांगी,ऊधम सिंह, भादनेर के महेंद्र यादव,राजेंद्र सिंह यादव,करमोदिया के रमेश ठाकुर,सेहजपुर के मदन सिंह पटेल,रेवाशंकर यादव, गोपाल सिंह ठाकुर,डाबरा इमलिया के भुजेंद्र सिंह जादौन,मूरैलकलां के सरपंच संतोष पाटीदार,शिवनारायणगौर,चैनू मसीह, हकीमखेड़ी के अख्तर पटेल, भुंआरा के मिथलेश लोधी आदि ने बताया के धान की फसल में इन दिनों तना छेदक व ब्लास्टर का खतरा बढ़ गया है। मौजूदा समय में जो कीटनाशक दवा स्प्रे जो मिल रहा है। वह ज्यादा असरकारक साबित नहीं हो रही है।
यूरिया खाद भी नहीं हो पा रही कारगर साबित
गंगई रोग से नई किस्म पूसा बासयमती की धान पर ज्यादा असर पड़ रहा है।जबकि देशी व भारी धान में इसका असर बेहद कम है। फिलहाल धान के कमजोर पड़े पौधों को संवारने के लिए पानी की ज्यादा जरूरत है।उतनी ही खाद की लेकिन पहले की तरह यूरिया खाद भी कारगर साबित नहीं हो पा रही है। इस कारण किसान बेहद चिंतित हैं। खरीफ फसलों को बचाने किसानों के पास कोई कारगर उपाय समझा नहीं आ रहा है।
उन्नत किस्म की फसले हो रही खराब
किसान रतीराम यादव अमरावद वाज्याफ्त ,लक्ष्मण सिंह यादव,कल्लू मेवाती,उन्नतशील किसान बागोद के सैयद जावेद उद्दीन, अंजुम खान ने बताया कि धान की रोपाई के दौरान पहले काफी बीज व रोपा खराब हो गया था। इसके बाद कीट के हमलों से उन्नत किस्म की पूसा बासमति धान व हाईब्रिड धान की फसलें खराब हो रही हैं।
चिंता में पड़ गए किसान
लगातार खरीफ सीजन की फसलों पर मौसम के उतार-चढ़ाव के असर के कारण फसलों पर बुरा असर पड़ रहा है।ऐेसे में कैसे संवरेगी धान की फसल। मानसून की बेरूखी के बाद और मानूस न की बेरूखी कवजह से धान के खेतों की निंदाई गुड़ाई किसान सहीं तरीके से नहीं कर पाए थे। धान की फसलों पर खतरा बढ़ा है। वहीं कीटों के हमले से किसान चिंता में पड़ गए हैं।
किसानों को दिए फसल बचाव के टिप्स
मौजूदा जलस्रोतों की स्थिति और फसल के अनुमानके आधार पर जिले में बारिश की बेरूखी और फसल की स्थिति का अनुमान सामने आ रहे हैं। कम क्षेत्रों में फसलों में रोग की शिकायत मिल रही है।किसानों को फसल उपचार की लगातार सलाह दी जा रही है।
एनपी सुमन उपसंचालक कृषि अधिकारी रायसेन
Published on:
17 Sept 2018 05:35 pm
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