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सतना/ जिले की सबसे बड़ी जरूरत मेडिकल कॉलेज का जनप्रतिनिधियों के मौन, रसूख के अतिक्रमण और प्रशासन की निष्क्रियता के कारण बंटाधार होता नजर आ रहा है। 'बिना विचारे जो करे, सो पीछे पछताय' यह कहावत कॉलेज के लिए आरक्षित जमीन का जिन अफसरों ने बिना सोचे-विचारे दूसरे विभागों को आवंटन कर दिया, उन पर सटीक बैठ रही। दरअसल, मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति मिलने में देरी को देखते हुए अफसरों ने आंख बंद कर जमीन को रेवड़ी की तरह बांटा। अब जब मेडिकल कॉलेज के लिए आवश्यक जमीन कम पड़ गई तो आनन-फानन निर्णय लेते हुए आठ एकड़ ऐसी जमीन मेडिकल कॉलेज के लिए आवंटित कर दी जो निर्माण कार्य के लिए उपयुक्त ही नहीं।
ऐसे में कहने के लिए तो मेडिकल कॉलेज के लिए ४६ एकड़ जमीन उपलब्ध है, लेकिन निर्माण कार्य के लिए मौके पर महज 30-35 एकड़ ही मिल पा रही। इसी पर मेडिकल कॉलेज, मेडिकल अस्पताल, खेल मैदान, हॉस्टल, ऑडिटोरियम, नर्सिंग कॉलेज तथा अन्य निर्माण होने हैं। इन निर्माण कार्यों के लिए निर्माण एजेंसी ने आवंटित जमीन पर कंसल्टेंट एजेंसी से जो नक्शा तैयार कराया है उसके अनुसार मौके पर जमीन नहीं मिल रही। ऐसे में अब अफसरों को निर्माण कार्य के लिए जमीन उपलब्ध कराने में पसीना छूट रहा है।
अतिक्रमण बना नासूर... तो शिफ्ट करना पड़ेगा कॉलेज भवन
निर्माण एजेंसी से जुड़े अधिकारियों ने बताया, यदि आरक्षित जमीन के दक्षिणी छोर पर बसी अवैध कॉलोनी को विस्थापित नहीं किया गया तो जमीन कम पडऩे से वहां पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज भवन को उत्तर दिशा में शिफ्ट करना पड़ेगा। यदि ऐसा हुआ तो कंसल्टेंट एजेंसी को फिर नया नक्शा तैयार करना होगा। इसकी स्वीकृति भोपाल से लेनी होगी। इतना ही नहीं, मेडिकल कॉलेज के ठीक सामने प्रस्तावित ऑडिटोरियम को दूसरी जगह शिफ्ट करना होगा। इससे लिए उस परिसर में दूसरी उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं है। कॉलेज की जमीन के उत्तर एवं पूर्व दिशा में स्थित निजी व सरकारी जमीन की सीमा को लेकर भी अफसर ऊहापोह की स्थिति में है। ठेका एजेंसी निर्माण कार्य चालू करने के लिए मौके पर कैम्प लगा चुकी है, लेकिन अफसर अभी तक मेडिकल के लिए आरक्षित जमीन खाली नहीं करा पाए हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य में देरी होना तय है।
मंत्री बोलीं-संभागायुक्त से मांगेंगे रिपोर्ट
चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ ने मेडिकल कॉलेज के मामले को गंभीरता से लिया है। गुरुवार को पत्रिका ने जब इस संबंध में उनसे बात की तो पूरे प्रकरण को लेकर वे काफी नाराज नजर आईं। कहा कि मामले में सीधे संभागायुक्त से बात करूंगी। अब तक की प्रोसेस की रिपोर्ट मांगेंगे।
सीमांकन के बाद ही शुरू हो सकेगा काम
कलेक्टर ने गुरुवार को राजस्व अमले के साथ मेडिकल कॉलेज के लिए आरक्षित जमीन का निरीक्षण किया। आरक्षित जमीन से अतिक्रमण हटाकर उसे खाली कराने के निर्देश दिए। अब निर्माण एजेंसी को जमीन के सीमांकन का इंतजार है। लेकिन, सवाल यह उठता है कि आरक्षित जमीन पर अतिक्रमण न होने का दावा करने वाला राजस्व अमल अब अवैध अतिक्रमण की पोल खुलने के बाद क्या कॉलेज की जमीन पर कुंडली मार कर बैठे रसूखदार एवं अवैध कब्जाधारियों को हटा पाएगा।
Published on:
15 Nov 2019 05:35 pm
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